Wednesday, May 22, 2024

प्रदेश में चौथे फेज की 8 सीटों पर 71.72 फीसद मतदान, इंदौर में दिखा नोटा का प्रभाव

भोपाल। प्रदेश में सोमवार को 8 सीटों देवास, इंदौर, उज्जैन, खरगोन, मंदसौर, खंडवा, रतलाम, धार में शाम 6 बजे तक 71.72 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। इन सीटों पर 2019 में 75.95 फीसदी मतदान हुआ था। उससे यह करीब 4 प्रतिशत कम है। सोमवार को 8 सीटों में सबसे ज्यादा मतदान खरगोन सीट पर 75.79 प्रतिशत हुआ। जबकि सबसे कम इंदौर में 60.53 प्रतिशत मतदान हुआ। प्रदेश में पहले और तीसरे चरण में मतदान प्रतिशत कम होने के बाद तीसरे चरण में मतदान प्रतिशत बढ़ा था। इसका कारण चुनाव आयोग के साथ ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के प्रयास को बताया गया था। इसके बाद चौथे चरण में मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई गई थी।

चौथे फेज की 8 सीटों पर सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू हुआ। सुबह 9 बजे 8 सीटों पर 14.97 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद दोपहर 11 बजे 32.38 प्रतिशत मतदान हुआ। दोपहर 1 बजे 48.52 प्रतिशत मतदान हुआ। 3 बजे मतदान का प्रतिशत 59.63 प्रतिशत और शाम 6 बजे 71.72 फीसदी मतदान हुआ। इंदौर में सबसे कम 60.53 प्रतिशत वोटिगं हुई।

पोहे- जलेबी बटे

जबकि यहां पर जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर व्यापारियों ने वोटिंग करने पर पोहे-जलेबी का नाश्ता फ्री कराने से लेकर कई तरह के प्रयास किए थे। इंदौर कलेक्टर ने दो इंस्टीट्यूट को बंद कराने की कार्रवाई की। इसके बावजूद इंदौर में पिछले बार की तुलना में करीब 8.78 प्रतिशत कम मतदान हुआ।

कहां कितना हुआ मतदान

चुनाव आयोग की तरफ से सोमवार शाम 6 बजे तक के जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा खरगोन में 75.79 प्रतिशत, मंदसौर में 74.50 प्रतिशत, देवास में 74.86 प्रतिशत, उज्जैन में 73.03 प्रतिशत, धार में 71.50 प्रतिशत, रतलाम में 72.86 प्रतिशत, खंडवा में 70.72 प्रतिशत और इंदौर में 60.53 प्रतिशत मतदान हुआ। पहले चरण में 19 अप्रैल और दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान हुआ था। इन दोनों चरणों में कम मतदान का कारण गर्मी और शादी विवाह कार्यक्रम को बताया गया था। इसके बाद तीसरे चरण में मतदान फीसद बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग और राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने अपनी तरफ से जोर लगाया।
बता दें कि इंदौर में नोटा को बढ़ावा दिया गया जिस कारण इंदौर में कम मतदान हुआ।
वहीं सीएम यादव ने दिए साक्षात्कार में कहा नोटा के समर्थन को नकारात्मकता की पराकाष्ठा है उन्होंने आगे कहा नोटा एक विकल्प है वह प्रत्याशी नहीं है। नोटा को बढ़ावा देना नकारात्मकता है।

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