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       <title>Today Where is Nimar Region News | Latest Where is Nimar Region News | Breaking Where is Nimar Region News in English | Latest Where is Nimar Region News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Where is Nimar Region समाचार:Today Where is Nimar Region News ,Latest Where is Nimar Region News,Aaj Ka Samachar ,Where is Nimar Region समाचार ,Breaking Where is Nimar Region News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.mp.inkhabar.com/tag/where-is-nimar-region</link>
        <lastBuildDate>April 16, 2026, 7:46 am</lastBuildDate>
        <copyright>MP Inkhabar</copyright>
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        </image><item><title>MP Politics: किंग मेकर मालवा-निमाड़ में इस साल कौन मार सकता है बाजी?</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/who-can-win-in-king-maker-malwa-nimar-this-year/</link><pubDate>July 18, 2023, 5:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/्ि्ोेि.JPG.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>भोपाल. मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाले चुनाव की तैयारियों में सभी प्रमुख दल लगे हुए हैं. बीजेपी अपने गढ़ को वापस हासिल करने में जुटी है तो वहीं कांग्रेस पार्टी 2018 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को 2023 में बरकरार रखने की प्लानिंग में है...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाले चुनाव की तैयारियों में सभी प्रमुख दल लगे हुए हैं. बीजेपी अपने गढ़ को वापस हासिल करने में जुटी है तो वहीं कांग्रेस पार्टी 2018 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को 2023 में बरकरार रखने की प्लानिंग में है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मालवा-निमाड़ पर कांग्रेस की पैनी नजर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मालवा-निमाड़ के 15 जिले इंदौर, धार, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नीमच और आगर में 66 विधानसभा सीटें हैं. मालवा निमाड़ को एमपी की सत्ता का रास्ता कहा जाता है. यहीं से होकर एमपी की सत्ता का रास्ता जाता है. यह रास्ता बीजेपी के लिए दुर्गम, जबकि कांग्रेस के लिए सुगम 2018 विधानसभा चुनाव में हुआ था. लिहाजा कांग्रेस पार्टी मालवा-निमाड़ में बढ़त बनाये रखने की तैयारी में जुटी हुई है, जबकि बीजेपी अपने गढ़ को वापस हासिल करने में जुटी हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मालवा निमाड़ में जयस की एंट्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मालवा-निमाड़ की राजनीति में जयस की एंट्री भी हो गई है, जिससे बीजेपी-कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है. बता दें कि मालवा निमाड़ में जयस तकरीबन डेढ़ दर्जन आदिवासी आरक्षित सीटों पर एक्टिव हैं. यही वजह है कि बीजेपी का 2018 में खेल बिगड़ गया था. गौरतलब है कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अच्छी खासी आदिवासियों की संख्या है. जयस की बात करें तो यह मुख्य रूप से आदिवासियों का संगठन है और 2018 के मुकाबले 2023 आते-आते जयस पहले से ज्यादा मजबूत हुई है. इसी के चलते अभी हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में जयस के कई प्रत्याशी चुनाव जीते थे तो इसलिए आने वाले विधानसभा चुनाव में जयस खासकर मालवा-निमाड़ में गेमचेंजर साबित हो सकती है. चूंकि मालवा निमाड़ को सत्ता की राह कहा जाता है. इसलिए जयस राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों का खेल भी बिगाड़ सकती है. चाहे जो हो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में मालवा-निमाड़ क्षेत्र दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा का फोकस एरिया बना हुआ है. मालवा और निमाड़ की अहमियत इस चुनाव में क्यों बढ़ गई है, इसके लिए साल 2018 के विधानसभा चुनावों के परिणामों को जानना जरूरी है. मालवा-निमाड़ की ज्यादातर सीटें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं. प्रदेश की कुल 230 सीटों में से एक चौथाई से ज्यादा ये 66 सीटें इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों में हैं. 66 में से 22 सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2018 के चुनाव परिणाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अब गौर करते हैं 2018 के परिणामों पर, इस वर्ष के विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ की 66 सीटों में से कांग्रेस ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी. भारतीय जनता पार्टी केवल 28 प्रत्याशी ही जीतकर विधानसभा पहुंचे सके थे. यही वो परिणाम था जिसने कांग्रेस के 15 साल का वनवास खत्म करके पार्टी को सत्ता की चाभी सौंपी थी. कांग्रेस के लिए यह परिणाम इसलिए भी उत्साहजनक रहा, क्योंकि 2013 के विधानसभा चुनाव में स्थितियां बिल्कुल उलट थीं. भाजपा ने इस इलाके में एक तरफा जीत हासिल करते हुए 57 सीटों पर अपना झंडा बुलंद किया था. वहीं कांग्रेस को सिर्फ 9 सीटें ही हासिल हो सकी थीं. हालांकि 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद मालवा-निमाड़ में सीटों के लिहाज से भाजपा के लिए फायदे वाला रहा. 66 सीटों में से अब भाजपा के पास 33 और कांग्रेस के पास 30 सीटें हैं. वहीं 3 निर्दलीय विधायक हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मालवा-निमाड़ में 22 सीटें आदिवासी आरक्षित&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि मध्यप्रदेश में कुल 47 आदिवासी आरक्षित सीटें हैं. इनमें से 22 मालवा-निमाड़ में हैं. पिछली बार इन सीटों में से 14 कांग्रेस और 7 भाजपा ने जीती थी. एक सीट खरगोन जिले की भगवानपुरा से निर्दलीय केदार चिड़ाभाई डावर विधायक चुने गए. हालांकि केदार कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं और अभी भी इनका समर्थन क्षेत्र के कद्दावर नेता अरुण सुभाष यादव के खेमे को है. वहीं मनावर सीट पर जय आदिवासी युवा शक्ति यानी जयस के संरक्षक डॉ. हिरालाल कांग्रेस के टिकट से पूर्व मंत्री रंजना बघेल को हराकर विजयी हुए थे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शिवराज सरकार की योजनाओं का पड़ेगा असर?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं आदिवासियों को रिझाने के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार ने योजनाओं का पिटारा खोल दिया है. वर्ष 2021 से प्रदेश में 15 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्मोत्सव पर शासकिय अवकाश घोषित किया गया. 15 नवंबर को जनजातीय दिवस पर शहडोल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष रूप से उपस्थित थीं. इसके अलावा सरकार ने जन नायक टंट्या भील ‘मामा’ की याद में टंट्या मामा गौरव यात्राएं भी निकाली थी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इन यात्राओं में शामिल हुए. आदिवासियों के लिए भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना शुरू की गई. इसमें 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के साथ 50 लाख रुपए तक के लोन की सुविधा दी जाती है. मुख्यमंत्री आदिवासी विशेष योजना में कृषि, उद्यानिकी, मछलीपालन, पशुपालन, तकनीकी शिक्षा आदि के लिए सहायता राशि का प्रावधान किया गया. टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना में 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के साथ 10 हजार से एक लाख रुपए तक लोन दिया जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत जोड़ो यात्रा का भी प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं आदिवासी बहुल मालवा निमाड़ से राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का निकलना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा. भारत जोड़ो यात्रा खंडवा, खरगोन, इंदौर, उज्जैन और आगर-मालवा जिले से होकर गुजरी. ये सभी जिले मालवा-निमाड़ में आते हैं. इस तरह इलाके के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह रहा. हालांकि देखना यह है कि कांग्रेस विधानसभा चुनावों तक यह उत्साह बरकरार रखने के लिए क्या-क्या करती है. जैसा कि मैने आपको बताया कि अभी भाजपा के पास 33 और कांग्रेस के पास 30 सीटें हैं. जबकि 3 निर्दलीय विधायक हैं. इस विधानसभा चुनाव में मालवा निमाड़ में कौन बाजी मारेगा, यह तो चुनाव परिणाम में ही सामने आएगा.&lt;/p&gt;
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