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       <title>Today specialstory News | Latest specialstory News | Breaking specialstory News in English | Latest specialstory News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का specialstory समाचार:Today specialstory News ,Latest specialstory News,Aaj Ka Samachar ,specialstory समाचार ,Breaking specialstory News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <lastBuildDate>May 17, 2026, 5:23 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Cheetah Day: अतंर्राष्ट्रीय दिवस चीता दिवस जंगल में छोड़े जाएंगे कूनो नेशनल पार्क के अग्नि और वायु</title><link>https://mp.inkhabar.com/desh-pradesh/cheetah-day-agni-and-vayu-of-kuno-national-park-will-be-released-in-the-forest-on-international-cheetah-day/</link><pubDate>December 2, 2024, 7:25 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/098-1.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के मौके पर कूनो नेशनल पार्क के चीतों को अब खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पार्क के बड़े बाड़े में बंद चीतों को खुले जंगल में छोड़ने का समय आ गया है। अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर नर चीता जिसका नाम अग्नि और वायु है को जं...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के मौके पर कूनो नेशनल पार्क के चीतों को अब खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पार्क के बड़े बाड़े में बंद चीतों को खुले जंगल में छोड़ने का समय आ गया है। अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर नर चीता जिसका नाम अग्नि और वायु है को जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कूनों जंगल का क्षेत्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चीतों को छोड़ने के दौरान चीता स्टीयरिंग कमेटी के सदस्यों के साथ कूनो पालपुर के सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। पहले चीतों को जोड़े में छोड़ने की योजना थी, लेकिन फिलहाल नर चीतों को छोड़ा जाने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही अब पर्यटकों को चीते खुले जंगल में दिखाई देने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाएगी। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक एक चीता के लिए लगभग 100 वर्ग किमी क्षेत्र काफी होता है। कूनो के जंगल का क्षेत्र लगभग 1200 वर्ग किमी का है। जिसमें 748 वर्ग किमी का मुख्य जोन में और 487 किमी बफर जोन बनाया गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चीतों को बाड़े में रखा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;1 मार्च, 2023 को पहली बार चीता पवन और आशा को खुले जंगल में छोड़ा गया था। इसके कुछ ही दिन बाद ही चीता गौरव (एल्टन) और शौर्य (फ्रेडी) को जंगलों में छोड़ा गया था। इस दौरान कई बार चीते राजस्थान और मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों तक पहुंच जाते थे। इन्हें ट्रैंकुलाइज करके वापस कूनो में लाया जाता। चीतों विशेषज्ञों के मुताबिक चीतों को बार-बार ट्रैंकुलाइज नहीं किया जाना चाहिए। कॉलर आईडी की रगड़ से गर्दन में हुए संक्रमण से हुई एक चीते की मौत के बाद बाहर घूम रहे सभी चीतों को सुरक्षित रखने के लिए बाड़े में बंद कर दिया गया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;वनमंडल को सौंपी चीते की जिम्मेदारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इन्हीं कुछ शंकाओ के कारण चीतों को खुले जंगल में छोड़ने पर फैसला लंबे समय से टल रहा था। चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले निश्चित किया गया कि चीतों का मूवमेंट जिस राज्य या जिले में होगा तो उसके भोजन और निगरानी की जिम्मेदारी उस राज्य से संबंधित वनमंडल की होगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Tulsi Vivah: आज है तुलसी विवाह, जानें लाभ और पूजा विधि</title><link>https://mp.inkhabar.com/festival/tulsi-vivah-today-is-tulsi-vivah-know-the-benefits-and-method-of-worship/</link><pubDate>November 12, 2024, 10:46 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/TUL-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>भोपाल। प्रबोधिनी एवं देवउठनी एकादशी का पर्व आज यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है। वेद पुराणों की माने तो दीपावली के बाद पड़ने वाली एकादशी के दिन देवउठनी कहते हैं। यही वजह है कि देवउठनी एकादशी के बाद से ही सारे मंगलकार्य आरंभ हो जाते हैं। तुलसी वि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; प्रबोधिनी एवं देवउठनी एकादशी का पर्व आज यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है। वेद पुराणों की माने तो दीपावली के बाद पड़ने वाली एकादशी के दिन देवउठनी कहते हैं। यही वजह है कि देवउठनी एकादशी के बाद से ही सारे मंगलकार्य आरंभ हो जाते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तुलसी विवाह के लाभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस एकादशी को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु छीर सागर में 4 महीने आराम करने के बाद निद्रा से जागते हैं। कार्तिक मास की एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु जागते हैं। इनके जागने के बाद ही से सभी तरह के शुभ और मांगल कार्यों की शुरूआत हो जाती है। ग्वालियर के ज्योतिषाचार्य रवि शर्मा का कहना है कि इस दिन तुलसी के साथ भगवान शालिग्राम का विवाह किया जाता है। तुलसी और शालिग्राम विवाह करने से कई जन्मों के पापों का प्रायश्चित हो जाता है। साथ ही घर में संपन्नता बनी रहती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तुलसी विवाह की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जिन व्यक्तियों के घर में कन्या नहीं है, वह एकादशी के दिन तुलसी शालिग्राम विवाह करके कन्यादान का फल प्राप्त कर सकते हैं। भगवान के श्री विग्रह के साथ तुलसी जी का विवाह बड़ी धूमधाम से किया जाता है। तुलसी जी के पौधे को गमले में रखकर दुल्हन की तरह सजाया जाता है और भगवान शालिग्राम जी के साथ उनका विवाह किया जाता है। एकादशी के दिन घरों में मंदिरों में गन्ने का मंडप तैयार किया जाता है। उस मंडप में ही भगवान शालिग्राम विष्णु भगवान की मूर्ति रखकर उनकी पूजा की जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जागरण और कीर्तन का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भगवान को बेर, आंवले, गन्ना, भाजी, सीताफल, सिंघाड़े, ज्वार के भुट्टे आदि अर्पित किए जाते हैं। शालिग्राम भगवान का विधि पूर्वक पूजन करके भगवान समेत मंडप की परिक्रमा की जाती है। देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य करने शुरू हो जाते है। इस साल देव उठने के साथ ही मंगल शहनाई शुरु हो जाती है। एकादशी के दिन जागरण और भागवत कीर्तन का खास महत्व होता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Compensation: तय सीमा में बिजली आपूर्ति न होने पर मिलेगा हर्जाना, केंद्र सरकार ने लागू किए नियम</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/compensation-compensation-will-be-given-if-electricity-is-not-supplied-within-the-prescribed-limit-central-government-has-implemented-rules/</link><pubDate>September 5, 2024, 11:29 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/BIJLI-300x225.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। यदि आप के घर में बिजली नहीं आ रही है और आपने इसकी शिकायत बिजली कंपनी को दी है। बिजली विभाग ने तय सीमा तक बिजली देना का वादा किया है। यदि तय समय सीमा में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। यदि आप के घर में बिजली नहीं आ रही है और आपने इसकी शिकायत बिजली कंपनी को दी है। बिजली विभाग ने तय सीमा तक बिजली देना का वादा किया है। यदि तय समय सीमा में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती है, तो उपभोक्ताओं को हर्जाना मिलेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; सुधार न होने पर देना होगा हर्जाना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बिजली विभाग उपभोक्ता को बिजली आपूर्ति का हर्जाना देगी। शहरी क्षेत्र में 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे में बिजली कंपनी को सुधार करना ही होगा। इसी तरह बिल बांटने में देरी, मीटर और ट्रांसफार्मर खराबी की शिकायत का निराकरण समय पर नहीं होने पर भी उपभोक्ता हर्जाना की मांग कर सकते है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने इस मामले में क्षतिपूर्ति मानदंड लागू कर दिए हैं। इस माह के बिजली बिलों के साथ उपभोक्ताओं को लागू मानदंड की सूची भी भेजी जा रही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिजली कंपनी पर लागू किए गए नियम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;केंद्र सरकार के निर्देश के बाद इंदौर बिजली कंपनी ने सबसे पहले मानदंड को तैयार किया। साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बिल में सुधार की शिकायत का निराकरण उसी दिन किया जाएगा। यदि देरी होती है तो लोगों को हर्जाना दिया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;नए कनेक्शन देना, फेज बदलाव करने से लेकर तमाम सभी कार्यों में समय सीमा और क्षतिपूर्ति का नियम लागू होगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;उपभोक्ता को अंतिम तारीख के कम से कम 10 दिन पहले तक बिल नहीं मिलता है तो हर्जाने की मांग कर सकते है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;सेवा में देरी होने पर उपभोक्ता क्षतिपूर्ति राशि का दावा कर सकते है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विभिन्न-विभिन्न समय सीमा लागू होगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Haploidentical Transplant : ब्लड आधा मैच होने जाने पर भी ट्रांसप्लांट संभव, मरीजों के लिए आधुनिक सुविधा उपलब्ध</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/haploidentical-transplant-transplant-possible-even-if-blood-is-half-match-modern-facilities-available-for-patients/</link><pubDate>August 26, 2024, 5:29 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/download-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल। इंदौर में मरीजों को अब आधुनिक सुविधाओ का भी लाभ मिलने लगा है। प्रदेश के पहले सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में बालिग मरीजों के लिए हैप्लो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है। इससे अब बच्चों के साथ ही सभी आयु वर्ग के मरीजों को ट्रांसप्लांट की...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल&lt;/strong&gt;। इंदौर में मरीजों को अब आधुनिक सुविधाओ का भी लाभ मिलने लगा है। प्रदेश के पहले सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में बालिग मरीजों के लिए हैप्लो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है। इससे अब बच्चों के साथ ही सभी आयु वर्ग के मरीजों को ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलनी शुरू हो गई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कई गंभीर बीमारियों का इलाज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अभी तक शत-प्रतिशत ब्लड मैच होने के बाद ही बोन मेरो ट्रांसप्लांट किया जा सकता था, लेकिन अब इस तकनीक के जरिए 50 फीसदी ब्लड मैच होने पर भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इसमें ल्यूकेमिया, क्रोनिक थेलेसीमिया, ब्लड कैंसर,एनीमिया आदि के मरीजों को सुविधा का लाभ मिल रहा है। अस्पताल में अब तक 2 बालिग मरीजों के ट्रांसप्लांट हो चुका हैं। निजी अस्पताल में इसका खर्च 35 लाख रुपये आता है, लेकिन एसएसएच में शासकीय योजना और संस्थाओं की सहायता से निशुल्क ही इलाज किया गया है। इस सुविधा से मरीजों से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हैप्लो का मतलब आधा मिलान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हेमेटोलाजिस्ट डॉ. अक्षय लाहोटी का कहना है कि ट्रांसप्लांट के लिए हम ब्लड ग्रुप मैच करते हैं। यदि ब्लड ग्रुप मैच नहीं है तो उसमें मरीज की रिस्क बढ़ जाती है। बोनमेरो ट्रांसप्लांट में ब्लड ग्रुप मैच नहीं होता तो ट्रांसप्लांट नहीं होता है, लेकिन इसमें यदि आधा मैच हो जाता है, तो भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इसके लिए ब्लड ग्रुप की तरह एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) मैच करवाते हैं। हैप्लो ट्रांसप्लांट यह होता है, जैसे मरीज और डोनर के फुल मैच 10 में से दो ही मिलते हैं, लेकिन हैप्लो मैच होना मुश्किल नहीं होता है। हैप्लो मतलब आधा मिलान होता है। एचएलए जांच करते हैं तो माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन से मैच होना आसान होता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Nag Panchami 2024: नाग पंचमी के अवसर पर नागतीर्थ शिखरधाम मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़</title><link>https://mp.inkhabar.com/festival/nag-panchami-2024-crowd-of-lakhs-of-devotees-at-nagtirtha-shikhardham-temple-on-the-occasion-of-nag-panchami/</link><pubDate>August 9, 2024, 12:44 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/6ujhvgb-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>भोपाल। निमाड़-मालवा का प्रसिद्ध नागतीर्थ शिखरधाम भिलटदेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यह मंदिर सतपुड़ा की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है। पोराणिक कथाओं की तर्ज पर प्रसिद्ध इस मंदिर में नागपंचमी पर वि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; निमाड़-मालवा का प्रसिद्ध नागतीर्थ शिखरधाम भिलटदेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यह मंदिर सतपुड़ा की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है। पोराणिक कथाओं की तर्ज पर प्रसिद्ध इस मंदिर में नागपंचमी पर विशेष मेला लगता है। इस मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीसी रोड का निर्माण किया गया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने यहां पर उज्जैन के महा नागलोक की तर्ज पर भिलटदेव महालोक बनाने की घोषणा की थी, जिसके तहत यहां पर भिलटदेव महा नागलोक का निर्माण जारी है।यहां शिखरधाम की पहाड़ी से सतपुड़ा का प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य देखते को मिलता है। हाल ही में यहां पर तीन किमी लंबी नई सीसी रोड का भी निर्माण किया गया है। इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया है।। नागलवाड़ी शिखरधाम भिलटदेव मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश यादव के मुताबिक यह मंदिर 800 साल पुराना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मंदिर का पुनर्निर्माण 2015 में हुआ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसा माना जाता है कि विक्रम संवत 2012 में भिलटदेव का प्राकट्य एमपी के हरदा जिले के रोल गांव में जन्म हुआ था। भिलटदेव सतपुड़ा पर्वत की चोटी पर लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। नागलवाड़ी शिखरधाम भगवान की तपस्या स्थली है। मंदिर का पुनर्निर्माण राजस्थानी बंशी पहाड़पुर गुलाबी रंग के पत्थरों से किया गया था। मंदिर का पुनर्निर्माण 2015 में हुआ।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pilgrimage: ब्रज भूमि के बाद अब श्री कृष्ण भक्तों के लिए बनाया जाएगा नया तीर्थ</title><link>https://mp.inkhabar.com/tourism/pilgrimage-after-braj-bhoomi-now-a-new-pilgrimage-will-be-built-for-shri-krishna-devotees/</link><pubDate>July 11, 2024, 8:32 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/cnm-300x169.png</image><category>पर्यटन</category><excerpt>भोपाल। ब्रज भूमि के बाद एमपी में श्री कृष्ण भक्तों के लिए नया तीर्थ बनने जा रहा है। मोहन सरकार श्री कृष्ण पाथेय के रूप में इस तीर्थ का आरंभ करने जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण प्रदेश में जिन शहरों से होकर गुजरे,वहांप्राचीन मंदिर व तीर्थ मौजूद है। न...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; ब्रज भूमि के बाद एमपी में श्री कृष्ण भक्तों के लिए नया तीर्थ बनने जा रहा है। मोहन सरकार श्री कृष्ण पाथेय के रूप में इस तीर्थ का आरंभ करने जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण प्रदेश में जिन शहरों से होकर गुजरे,वहां&lt;br&gt;प्राचीन मंदिर व तीर्थ मौजूद है। नए स्थानों पर इस्कॉन प्रबंधन द्वारा मंदिर बनाया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; पथ के रूप में चिहित कर मदिंर बनाए जाएंगे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;श्री कृष्ण के प्रचार-प्रसार के लिए इस्कॉन प्रबंधन द्वारा 17 स्थानों से रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस्कॉन मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास प्रभु का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण उज्जैन के सांदीपनि आश्रम ग्राम नारायणा, धार के अमझेरा और बदनावर भी आए थे। भगवान के जहां-जहां चरण पड़े,उन स्थानों को भगवान श्री कृष्ण पाथेय योजना के तहत राज्य सरकार विकसित करेगी। एमपी के सीएम डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद इन स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस्कॉन मंदिर प्रबंधन भी श्री कृष्ण गमन पथ के रूप में चिह्नित प्रदेश के प्रमुख शहरों में मंदिर निर्माण की योजना बना रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;790&quot; height=&quot;444&quot; src=&quot;https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-9899&quot; srcset=&quot;https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv.png 790w, https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv-300x169.png 300w, https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv-768x432.png 768w, https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv-150x84.png 150w, https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/xzcv-696x391.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बदनवार में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बदनवार में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जल्द ही सागर व बीना में मंदिर निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। प्रदेश में श्री कृष्ण भक्ति के प्रचार और प्रसार के लिए इस साल 17 जगहों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाएगी। परम पूज्य भक्त प्रेम स्वामीजी महाराज के नेतृत्व में निकाली जा रही इन यात्राओं की शुरूआत 7 जुलाई को उज्जैन से हुई। 8 जुलाई को बदनवार व बीना, 9 जुलाई को टीकमगढ़, 10 जुलाई को छिंदवाड़ा में यात्रा निकाली जा चुकी है।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>