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       <title>Today seat analysis News | Latest seat analysis News | Breaking seat analysis News in English | Latest seat analysis News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का seat analysis समाचार:Today seat analysis News ,Latest seat analysis News,Aaj Ka Samachar ,seat analysis समाचार ,Breaking seat analysis News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <lastBuildDate>June 18, 2026, 5:55 am</lastBuildDate>
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        </image><item><title>MP Politics: जानें कमलनाथ के गढ़ का चुनावी इतिहास, इस बार किसके पक्ष में होगा परिणाम</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/know-the-election-history-of-kamal-naths-stronghold-this-time-the-result-will-be-in-whose-favor/</link><pubDate>September 30, 2023, 5:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-15-2.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>भोपाल. अगर आप राजनीति में रुचि रखते हैं तो छिंदवाड़ा का नाम सुनते ही आपके दिमाग में सबसे पहले नाम आता है कमलनाथ का और खास बात ये है कि वर्तमान में इस विधानसभा सीट से विधायक हैं, इसलिए ये राज्य की सबसे वीआईपी सीटों में से एक है. इस सीट पर पिछले ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;अगर आप राजनीति में रुचि रखते हैं तो छिंदवाड़ा का नाम सुनते ही आपके दिमाग में सबसे पहले नाम आता है कमलनाथ का और खास बात ये है कि वर्तमान में इस विधानसभा सीट से विधायक हैं, इसलिए ये राज्य की सबसे वीआईपी सीटों में से एक है. इस सीट पर पिछले कुछ चुनावों की बात करें तो वोर्टस ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों का बटन दबाया है तो आइए जानते हैं इस सीट के आंकड़े, समीकरण और इतिहास.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए पिछले कुछ चुनावों का परिणाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर पिछले चार चुनावों में, कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा सामने आई है. 2008 के चुनाव में, कांग्रेस के दीपक सक्सेना 64,740 वोटों के साथ विजयी हुए, उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह को हराया था. यहां मुकाबला बहुत करीबी था. दीपक सक्सेना ने 3,444 वोटों से जीत हासिल की थी. वहीं, 2013 के चुनाव में, भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी, कांग्रेस के दीपक सक्सेना की तुलना में 24,778 अधिक वोट प्राप्त करके, अधिक अंतर से सीट जीती थी. 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस के दीपक सक्सेना ने एक बार फिर 50% वोट शेयर हासिल करते हुए 104,034 वोटों के साथ जीत दर्ज की. जबकि, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह को 89, 487 वोट मिले, जिसके चलते सक्सेना की जीत का अंतर 14,547 वोटों का रहा. हालांकि, 2018 में कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दीपक सक्सेना ने ये कमलनाथ के लिए छोड़ दी. जिसके बाद 2019 के उपचुनाव में कमलनाथ ने 1,14,459 वोट पाकर बड़ी जीत हासिल की थी. उन्होंने बीजेपी के विवेक बंटी साहू को 25, 837 वोटों के अंतर से हराया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है सियासी इतिहास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;छिंदवाड़ा के सियासी इतिहास की बात करें तो राजनीतिक परिदृश्य में पिछले कुछ वर्षों में BJP और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखी गई है. 1972 से 1993 तक कांग्रेस का दबदबा रहा, 1990 में थोड़ी रुकावट आई जब भाजपा ने यह सीट जीत ली. कांग्रेस के दीपक सक्सेना ने 1993 में इस सीट पर दोबारा कब्जा किया और 2008 और 2018 में भी इस पर जीत हासिल. वहीं, इससे पहले 2013 में, भाजपा के चंद्रभान सिंह चौधरी ने जीत हासिल की थी. 2019 के उपचुनाव में कमल नाथ ने ये सीट जीतकर अपने नाम की थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;SC-ST वोटर्स तय करते हैं हार-जीत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वहीं छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर जनता एक-एक बार बीजेपी और कांग्रेस को मौका देती रही है. खास बात यह है कि यहां किसी भी उम्मीदवार की जीत में एसटी और एससी मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं. जो इस निर्वाचन क्षेत्र में नतीजे तय करते हैं. साथ ही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बसपा की उपस्थिति इस विधानसभा सीट पर है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Politics: शिवपुरी विधानसभा सीट पर नहीं पड़ता जातीय समीकरण का कोई असर</title><link>https://mp.inkhabar.com/election/caste-equation-has-no-impact-on-shivpuri-assembly-seat/</link><pubDate>September 25, 2023, 12:47 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-3-2-300x169.jpg</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल. एमपी में बीजेपी-कांग्रेस सत्ता पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरे दमखम के साथ लगी हुई हैं. ऐसे में खबरें सामने आ रही है कि अगले महीने चुनाव की तारीख तय हो सकती है. वहीं विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी पार्टियां दावेदारों के आंकड़ें खंगाल रही...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;एमपी में बीजेपी-कांग्रेस सत्ता पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरे दमखम के साथ लगी हुई हैं. ऐसे में खबरें सामने आ रही है कि अगले महीने चुनाव की तारीख तय हो सकती है. वहीं विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी पार्टियां दावेदारों के आंकड़ें खंगाल रही हैं. तो आइये अब समझते हैं कि 25 साल से बीजेपी के कब्जे में बनी हुई शिवपुरी विधानसभा के बारे में, जहां राजघराने का ही प्रभाव रहा है. शिवपुरी में जब से यशोधरा राजे सिंधिया की एंट्री हुई तब से बीजेपी कभी नहीं हारी. तो चलिए अब जानते हैं शिवपुरी विधानसभा के सियासी और जातीय समीकरण के बारे में.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;25 साल से बीजेपी की पकड़&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ऐसा कहा जाता है कि शिवपुरी में सिंधिया राजघराने का ही वर्चश्व रहा है. 1980 और 1985 में यहां माधव राव सिंधिया के करीबी रहे गणेश गौतम ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद यहां राजघराने के सदस्य की बीजेपी के टिकट पर सीधी एंट्री होती है और तब से लेकर आज तक बीजेपी यहां से नहीं हारी. हालांकि, बीच में 5 साल के लिए जब यशोधरा राजे सिंधिया सांसद बनी तो बीजेपी ने दूसरा उम्मीदवार उतारा, फिर उन्होंने भी जीत हासिल की. इसी कारण कहा जाता है कि शिवपुरी में राजघराने ने बीजेपी की पकड़ मजबूत की है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजनीतिक इतिहास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चुनावी इतिहास की बात की जाए तो 1998 में यशोधरा राजे सिंधिया ने हरिवल्लभ शुक्ला को 7300 वोटों से हराया, 2003 में दूसरी बार राजे ने गणेशराम गौतम को करीब 25 हजार मतों से हराया, 2008 में बीजेपी के माखनलाल राठौर ने वीरेंद्र रघुवंशी को 1751 मतों से मात दी, 2013 में राजे एक बार फिर लौटीं और वीरेंद्र रघुवंशी को करीब 11,145 वोटों से हराया, 2018 में यशोधरा राजे सिंधिया ने कांग्रेस के सिद्धार्थ लाडा को 28,748 वोटों से पराजित किया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जातीय समीकरण नहीं डालते प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;शिवपुरी विधानसभा सीट में सिंधिया घराने के प्रभाव की वजह से जातीय आंकड़े ज्यादा प्रभावित नहीं करते. ऐसा कहा जाता है कि परिवार का सदस्य होने के कारण अभी तक कांग्रेस यहां से तगड़ा प्रत्याशी भी नहीं उतारती थी. वैसे जातियों के प्रभाव के बारे में देखा जाए तो सबसे ज्यादा वैश्य वोटर्स उसके बाद आदिवासी वोटर्स हैं. इनकी संख्या 50 हजार के आसपास है. वहीं 20 हजार के आसपास ब्राह्मण वोटर्स हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Politics: देवतालाब विधानसभा में 25 सालों से खिल रहा कमल, इस बार क्या रहेगा माहौल</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/lotus-has-been-blooming-in-devtalab-assembly-for-25-years-what-will-be-the-atmosphere-this-time/</link><pubDate>September 24, 2023, 1:04 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/dsfarh.JPG-300x169.jpg</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल. मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले दलबदल और दावेदारी का दौर शुरू हो गया है. मऊगंज की VIP सीट देवतालाब से गिरीश गौतम विधायक हैं. देवतालाब की सबसे खास बात ये है कि यहां 25 साल से बीजेपी का कब्जा है. कांग्रेस ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;भोपाल.&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले दलबदल और दावेदारी का दौर शुरू हो गया है. मऊगंज की VIP सीट देवतालाब से गिरीश गौतम विधायक हैं. देवतालाब की सबसे खास बात ये है कि यहां 25 साल से बीजेपी का कब्जा है. कांग्रेस 1985 में आखिरी बार यहां से चुनाव जीती थी. इसके बाद वो नंबर दो पर भी नहीं आ पाई. 1985 के बाद 2 बार बीएसपी और 5 बार से बीजेपी यहां से जीती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सियासी समीकरण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;देवतालाब के सियासी समीकरण की बात करें तो विंध्य की ये सीट भी सामान्य वर्ग के वर्चस्व वाली है. लेकिन, OBC/ST/SC मिलाकर ये आंकड़ा 50 के पार हो जाता है. ऐसे में जीत उसी की होती है जिसके पक्ष में सामान्य या OBC वोट करते हैं. आंकड़ों पर गौर किया जाए तो OBC 34 फीसदी, सामान्य के 34 फासदी वोट हैं. इसके अलावा 18 फीसदी एससी और 10 फीसदी एसटी वोटर हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2018 का चुनावी परिणाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अब गौर करते है 2018 के चुनावी परिणाम पर, बता दें कि विधानसभा चुनाव 2018 में यहां बीजेपी ने कब्जा जमाया था. ऐसा भाजपा ने लगातार 5वीं बार किया था. हालांकि, अंतर बहुत ज्यादा नहीं था. यहां से बीजेपी के गिरीश गौतम ने बीसपी की सीमा जयवीर को 1080 मतों से हराया था. इसके बाद गिरीश गौतम को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये सीट VIP हो गई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;25 साल से बीजेपी के कब्जे में है सीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पिछले कुछ चुनावों को देखा जाए तो यहां से कांग्रेस जब से हार रही है तब से दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पा रही है. आखिरी बार 1985 में कांग्रेस ने देवतालाब से जीत हासिल की थी. इसके बाद दो बार BSP ने यहां कब्जा जमाया. अब 1998 से अभी तक यहां बीजेपी का कब्जा है. इसमें 2008 से अभी तक 3 चुनावों में गिरीश गौतम ने जीत हासिल की है. इससे पहले 1998 और 2023 में बीजेपी के ही पंचू लाल प्रजापति यहां से विधायक रहे. 1990 और 93 में बीएसपी के जयकरण और उससे पहले 1985 में कांग्रेस के बिंद्रा और 1980 में रामखेलवान ने जीत हासिल की थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2023 में कौन मारेगा बाजी?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;देवतालाब में OBC और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी बराबर की है. मुकाबला ज्यादातर बीएसपी और बीजेपी के बीच में ही होता आया है. अगर इस बार कांग्रेस ने यहां से कड़ी टक्कर दी तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है. हालांकि, ये तो जनता पार्टियों के प्रत्याशी जानने के बाद ही तय करेगी कि देवतालाब से भोपाल का सफर किसे कराना है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Assembly Election 2023: जानिए पाटन विधानसभा का जातीय समीकरण</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/know-the-caste-equation-of-patan-assembly/</link><pubDate>September 24, 2023, 12:19 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-59-300x169.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>भोपाल. मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को जनता ने बारी-बारी मौका दिया और यहां पर दिलचस्प मुकाबला हुआ है. पाटन विधानसभा की बात करें तो यहां भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय विश्नोई वि...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;भोपाल.&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को जनता ने बारी-बारी मौका दिया और यहां पर दिलचस्प मुकाबला हुआ है. पाटन विधानसभा की बात करें तो यहां भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय विश्नोई विधायक हैं. 2018 में अजय विश्नोई ने यहां से कांग्रेस के तत्कालीन विधायक नीलेश अवस्थी को चुनाव में हराया था. आपको बता दें कि इससे पहले 2013 के चुनाव में अजय विश्नोई को यहां से कांग्रेस के नीलेश अवस्थी ने हराया था, तो चलिए यहां कि सीट का विश्लेषण करते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अजय विश्नोई हैं विधायक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आपको बता दें कि पाटन विधानसभा से वर्तमान विधायक भाजपा के अजय विश्नोई हैं. उन्होंने 2018 के चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन विधायक नीलेश अवस्थी को हराकर सीट जीती थी. 2018 में अजय विश्नोई की जीत से पहले 2013 के चुनाव में कांग्रेस के नीलेश अवस्थी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. वहीं 2008 के चुनाव में अजय विश्नोई ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी. आपको बता दें कि मौजूदा बीजेपी विधायक अजय विश्नोई कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं. उन्होंने हाल ही में शिवराज सरकार के कैबिनेट विस्तार पर भी सवाल उठाए थे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस-बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पाटन विधानसभा क्षेत्र में हाल के वर्षों में भाजपा और कांग्रेस के बीच आर-पार की लड़ाई देखी गई है. कांग्रेस के नीलेश अवस्थी 2013 में जीतने में कामयाब रहे, लेकिन भाजपा के अजय विश्नोई ने 2018 में जीत हासिल की, जिससे सीट वापस भाजपा की झोली में आ गई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2018 के चुनाव परिणाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;2018 के चुनाव परिणाम की बात करें तो बीजेपी से अजय विश्नोई ने 100,443 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. वहीं कांग्रेस से नीलेश अवस्थी को 73,731 वोटों के साथ हार का सामना करना पड़ा था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुल जनसंख्या 3,33,357&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वहीं जातीय समीकरण पर नजर डाले तो पाटन विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 3,33,357 है, जिसमें मतदाताओं की संख्या 2,35,000 है. कुल जनसंख्या का 85.94% ग्रामीण निवासी हैं, जबकि 14.06% शहरी क्षेत्रों में रहते हैं. आबादी में, 15.77% आदिवासी मूल के हैं और 16.95% दलित समुदाय से हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में 77.63% मतदान हुआ था. गौरतलब है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में किसी एक जाति का बहुमत नहीं है. कटंगी क्षेत्र में कम जनसंख्या में मुस्लिम उपस्थिति के साथ राजपूत ठाकुर, ब्राह्मण, बनिया, लोधी कुर्मी और जैन समुदाय सह-अस्तित्व में हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Election 2023: बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी ग्वालियर पूर्व विधानसभा, जानिए जातीय समीकरण</title><link>https://mp.inkhabar.com/election/gwalior-east-assembly-used-to-be-the-stronghold-of-bjp-know-the-caste-equation/</link><pubDate>September 23, 2023, 8:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-2-2-300x169.jpg</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल. ग्वालियर जिले की सबसे बड़ी विधानसभा ग्वालियर पूर्व सीट कभी बीजेपी के सबसे मजबूत किले के रूप में जानी जाती थी, लेकिन 2018 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. दिलचस्प बात यह भी है कि ग्वालियर चंबल अंचल से आने वाले बीजेपी के 2 दिग्गज नेता कें...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;ग्वालियर जिले की सबसे बड़ी विधानसभा ग्वालियर पूर्व सीट कभी बीजेपी के सबसे मजबूत किले के रूप में जानी जाती थी, लेकिन 2018 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. दिलचस्प बात यह भी है कि ग्वालियर चंबल अंचल से आने वाले बीजेपी के 2 दिग्गज नेता केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही इस विधानसभा के वोटर हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;1977 से अस्तित्व में आई ग्वालियर पूर्व सीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;साल 1977 से अस्तित्व में आई ग्वालियर पूर्व विधानसभा सीट पर अब तक कुल 11 बार चुनाव हो चुके हैं. खास बात तो यह है कि इस सीट पर कुल 6 बार बीजेपी ने जीत दर्ज की है, जबकि 4 बार कांग्रेस को चुना गया है. एक बार जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. वर्तमान में यहां 2020 में बीजेपी से छोड़कर कांग्रेस में आए डॉ सतीश सिकरवार विधायक हैं. सिकरवार ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए सिंधिया समर्थक नेता मुन्नालाल गोयल को उपचुनाव में हराया था. इस प्रकार दल बदल के फेर में यह सीट कांग्रेस के पास रही.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सतीश सिकरवार को मिले थे 49% वोट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े डॉ सतीश सिकरवार को 49% से ज्यादा वोट मिले, जबकि विधायकी से इस्तीफा देने वाले मुन्नालाल गोयल को 44% वोट मिले. सिकरवार ने यह चुनाव 8,555 मतों से जीता था. तीसरे नंबर पर बसपा के महेश बघेल रहे थे. वर्तमान समय में कांग्रेस की तरफ से एक बार फिर सतीश सिकरवार को ही मैदान में उतारा जा सकता है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा एक बार फिर सिंधिया समर्थक गोयल पर दांव लगाएगी या किसी अन्य प्रत्याशी को मौका दिया जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्वालियर पूर्व का राजनीतिक इतिहास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;तो चलिए अब बात करते है, ग्वालियर पूर्व के राजनीतिक इतिहास की. परिसीमन के बाद 2008 में भाजपा के अनूप मिश्रा ने कांग्रेस के मुन्नालाल गोयल को हराया था. 2013 में भाजपा की माया सिंह ने फिर से चुनावी मैदान में उतरे मुन्नालाल गोयल को हराया था. 2018 में कांग्रेस के मुन्नालाल गोयल ने BJP के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे सतीश सिकरवार को हराया था. 2020 के उपचुनाव में कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरे सतीश सिकरवार ने BJP के हो चुके मुन्नालाल गोयल को हराया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए जातिगत समीकरण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आपको याद हो कि यह विधानसभा 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. इससे पहले इस विधानसभा को मुरार विधानसभा के नाम से जाना जाता था. ग्वालियर पूर्व विधानसभा में कुल मतदाता 3 लाख 26 हजार 26 है. जिसमें पुरुष 1 लाख 73 हजार 690, महिला 1 लाख 52 हजार 320 और थर्ड जेंडर 16 है. जेंडर रेशों 877 है. ग्वालियर पूर्व के जातीय समीकरण की बात की जाए तो शहरी क्षेत्र होने की वजह से लगभग सभी जातियों के वोटर्स देखने को मिल जाएंगे, लेकिन ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, गुर्जर, बघेल, कुशवाह, आदिवासी, सिंधी और मुस्लिम महत्वपूर्ण वोटर हैं.&lt;/p&gt;
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