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       <title>Today Seat Analysis MP News | Latest Seat Analysis MP News | Breaking Seat Analysis MP News in English | Latest Seat Analysis MP News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Seat Analysis MP समाचार:Today Seat Analysis MP News ,Latest Seat Analysis MP News,Aaj Ka Samachar ,Seat Analysis MP समाचार ,Breaking Seat Analysis MP News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <copyright>MP Inkhabar</copyright>
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        </image><item><title>MP Politics: शिवपुरी विधानसभा सीट पर नहीं पड़ता जातीय समीकरण का कोई असर</title><link>https://mp.inkhabar.com/election/caste-equation-has-no-impact-on-shivpuri-assembly-seat/</link><pubDate>September 25, 2023, 12:47 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-3-2.jpg</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल. एमपी में बीजेपी-कांग्रेस सत्ता पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरे दमखम के साथ लगी हुई हैं. ऐसे में खबरें सामने आ रही है कि अगले महीने चुनाव की तारीख तय हो सकती है. वहीं विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी पार्टियां दावेदारों के आंकड़ें खंगाल रही...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;एमपी में बीजेपी-कांग्रेस सत्ता पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरे दमखम के साथ लगी हुई हैं. ऐसे में खबरें सामने आ रही है कि अगले महीने चुनाव की तारीख तय हो सकती है. वहीं विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी पार्टियां दावेदारों के आंकड़ें खंगाल रही हैं. तो आइये अब समझते हैं कि 25 साल से बीजेपी के कब्जे में बनी हुई शिवपुरी विधानसभा के बारे में, जहां राजघराने का ही प्रभाव रहा है. शिवपुरी में जब से यशोधरा राजे सिंधिया की एंट्री हुई तब से बीजेपी कभी नहीं हारी. तो चलिए अब जानते हैं शिवपुरी विधानसभा के सियासी और जातीय समीकरण के बारे में.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;25 साल से बीजेपी की पकड़&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसा कहा जाता है कि शिवपुरी में सिंधिया राजघराने का ही वर्चश्व रहा है. 1980 और 1985 में यहां माधव राव सिंधिया के करीबी रहे गणेश गौतम ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद यहां राजघराने के सदस्य की बीजेपी के टिकट पर सीधी एंट्री होती है और तब से लेकर आज तक बीजेपी यहां से नहीं हारी. हालांकि, बीच में 5 साल के लिए जब यशोधरा राजे सिंधिया सांसद बनी तो बीजेपी ने दूसरा उम्मीदवार उतारा, फिर उन्होंने भी जीत हासिल की. इसी कारण कहा जाता है कि शिवपुरी में राजघराने ने बीजेपी की पकड़ मजबूत की है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजनीतिक इतिहास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चुनावी इतिहास की बात की जाए तो 1998 में यशोधरा राजे सिंधिया ने हरिवल्लभ शुक्ला को 7300 वोटों से हराया, 2003 में दूसरी बार राजे ने गणेशराम गौतम को करीब 25 हजार मतों से हराया, 2008 में बीजेपी के माखनलाल राठौर ने वीरेंद्र रघुवंशी को 1751 मतों से मात दी, 2013 में राजे एक बार फिर लौटीं और वीरेंद्र रघुवंशी को करीब 11,145 वोटों से हराया, 2018 में यशोधरा राजे सिंधिया ने कांग्रेस के सिद्धार्थ लाडा को 28,748 वोटों से पराजित किया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जातीय समीकरण नहीं डालते प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शिवपुरी विधानसभा सीट में सिंधिया घराने के प्रभाव की वजह से जातीय आंकड़े ज्यादा प्रभावित नहीं करते. ऐसा कहा जाता है कि परिवार का सदस्य होने के कारण अभी तक कांग्रेस यहां से तगड़ा प्रत्याशी भी नहीं उतारती थी. वैसे जातियों के प्रभाव के बारे में देखा जाए तो सबसे ज्यादा वैश्य वोटर्स उसके बाद आदिवासी वोटर्स हैं. इनकी संख्या 50 हजार के आसपास है. वहीं 20 हजार के आसपास ब्राह्मण वोटर्स हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Politics: देवतालाब विधानसभा में 25 सालों से खिल रहा कमल, इस बार क्या रहेगा माहौल</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/lotus-has-been-blooming-in-devtalab-assembly-for-25-years-what-will-be-the-atmosphere-this-time/</link><pubDate>September 24, 2023, 1:04 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/dsfarh.JPG-300x169.jpg</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल. मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले दलबदल और दावेदारी का दौर शुरू हो गया है. मऊगंज की VIP सीट देवतालाब से गिरीश गौतम विधायक हैं. देवतालाब की सबसे खास बात ये है कि यहां 25 साल से बीजेपी का कब्जा है. कांग्रेस ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल.&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले दलबदल और दावेदारी का दौर शुरू हो गया है. मऊगंज की VIP सीट देवतालाब से गिरीश गौतम विधायक हैं. देवतालाब की सबसे खास बात ये है कि यहां 25 साल से बीजेपी का कब्जा है. कांग्रेस 1985 में आखिरी बार यहां से चुनाव जीती थी. इसके बाद वो नंबर दो पर भी नहीं आ पाई. 1985 के बाद 2 बार बीएसपी और 5 बार से बीजेपी यहां से जीती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सियासी समीकरण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;देवतालाब के सियासी समीकरण की बात करें तो विंध्य की ये सीट भी सामान्य वर्ग के वर्चस्व वाली है. लेकिन, OBC/ST/SC मिलाकर ये आंकड़ा 50 के पार हो जाता है. ऐसे में जीत उसी की होती है जिसके पक्ष में सामान्य या OBC वोट करते हैं. आंकड़ों पर गौर किया जाए तो OBC 34 फीसदी, सामान्य के 34 फासदी वोट हैं. इसके अलावा 18 फीसदी एससी और 10 फीसदी एसटी वोटर हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2018 का चुनावी परिणाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अब गौर करते है 2018 के चुनावी परिणाम पर, बता दें कि विधानसभा चुनाव 2018 में यहां बीजेपी ने कब्जा जमाया था. ऐसा भाजपा ने लगातार 5वीं बार किया था. हालांकि, अंतर बहुत ज्यादा नहीं था. यहां से बीजेपी के गिरीश गौतम ने बीसपी की सीमा जयवीर को 1080 मतों से हराया था. इसके बाद गिरीश गौतम को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये सीट VIP हो गई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;25 साल से बीजेपी के कब्जे में है सीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पिछले कुछ चुनावों को देखा जाए तो यहां से कांग्रेस जब से हार रही है तब से दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पा रही है. आखिरी बार 1985 में कांग्रेस ने देवतालाब से जीत हासिल की थी. इसके बाद दो बार BSP ने यहां कब्जा जमाया. अब 1998 से अभी तक यहां बीजेपी का कब्जा है. इसमें 2008 से अभी तक 3 चुनावों में गिरीश गौतम ने जीत हासिल की है. इससे पहले 1998 और 2023 में बीजेपी के ही पंचू लाल प्रजापति यहां से विधायक रहे. 1990 और 93 में बीएसपी के जयकरण और उससे पहले 1985 में कांग्रेस के बिंद्रा और 1980 में रामखेलवान ने जीत हासिल की थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2023 में कौन मारेगा बाजी?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;देवतालाब में OBC और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी बराबर की है. मुकाबला ज्यादातर बीएसपी और बीजेपी के बीच में ही होता आया है. अगर इस बार कांग्रेस ने यहां से कड़ी टक्कर दी तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है. हालांकि, ये तो जनता पार्टियों के प्रत्याशी जानने के बाद ही तय करेगी कि देवतालाब से भोपाल का सफर किसे कराना है.&lt;/p&gt;
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