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       <title>Today Mp high court News | Latest Mp high court News | Breaking Mp high court News in English | Latest Mp high court News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Mp high court समाचार:Today Mp high court News ,Latest Mp high court News,Aaj Ka Samachar ,Mp high court समाचार ,Breaking Mp high court News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <lastBuildDate>May 1, 2026, 6:58 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>MP: जहरीले कचरे पर SC का सुनवाई से इनकार, कार्रवाई करने के लिए डेढ़ माह का समय मिला</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-sc-refuses-to-hear-on-toxic-waste-gets-one-and-a-half-month-time-to-take-action/</link><pubDate>January 6, 2025, 9:50 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/download-6.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल: सालों पुरानी घटना &amp;#8216;भोपाल गैस त्रासदी&amp;#8217; के बचे हुए जहरीले कचरे की ढ़ेर को हटाने के विरोध में लोगों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने पर रोक लगाने की मांग वाले मामले की सुनव...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल:&lt;/strong&gt; सालों पुरानी घटना &amp;#8216;भोपाल गैस त्रासदी&amp;#8217; के बचे हुए जहरीले कचरे की ढ़ेर को हटाने के विरोध में लोगों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने पर रोक लगाने की मांग वाले मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि आप चाहें तो इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई कोर्ट ने दिया था आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, एमपी हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को आदेश दिया था कि भोपाल से कचरा चार सप्ताह के भीतर निपटान स्थल (पीथमपुर) पहुंचाया जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वह चाहें तो हाई कोर्ट की सुनवाई में अपनी बात रख सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर भोपाल से धार जिले के पीथमपुर तक कूड़ा ले जाने और वहां जलाने पर रोक लगाने की मांग की गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लोगों से सलाह नहीं ली गई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि याचिका में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से ले जाने का फैसला लेते समय पीथमपुर के लोगों से सलाह नहीं ली गई. इसके अलावा पीथमपुरा में रेडिएशन का भी खतरा हो सकता है. यदि वहां ऐसा होता है तो पीथमपुरा में उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कार्रवाई करने के लिए 6 सप्ताह का समय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इधर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मोहन सरकार को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के कचरे के निपटान पर सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है। 12 सीलबंद कंटेनरों में पैक किए गए कचरे को 2 जनवरी को राज्य की राजधानी भोपाल में बंद यूनियन कार्बाइड कारखाने से 250 किमी दूर धार जिले के पीथमपुर में निपटान स्थल पर ले जाया गया था। एमपी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसके कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पीथमपुर के लोगों को विश्वास में लेने और कचरे को नष्ट करने से पहले उनके मन से डर दूर करने का अनुरोध करने के बाद समय दिया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>High Court: हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी पर लगाी रोक, युवती से कही दोबारा विचार करने की बात</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/high-court-ban-on-marriage-of-hindu-muslim-couple-asked-the-girl-to-reconsider/</link><pubDate>November 9, 2024, 10:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/mp-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हिंदू युवती और मुस्लिम युवक की स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाली शादी पर प्रतिबंध लगा दिया है। पहले उन्हें सिंगल बेंच ने इसकी इजाजत दे दी थी। यह अधिनियम अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़ा है। नो ऑब्जेक्शन नोटिस जरुरी क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हिंदू युवती और मुस्लिम युवक की स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाली शादी पर प्रतिबंध लगा दिया है। पहले उन्हें सिंगल बेंच ने इसकी इजाजत दे दी थी। यह अधिनियम अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़ा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नो ऑब्जेक्शन नोटिस जरुरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कुछ समय पहले न्यायाधीश विशाल धगात की सिंगल बेंच ने हिंदू महिला से कहा था कि वे सरकार द्वारा संचालित शेल्टर में जाकर मुस्लिम युवक से अपनी शादी के बारे में विचार करें और उससे कहा था कि वह 12 नवंबर तक उससे बात ना करे, जिस दिन उनकी शादी होनी थी। दोनों ने जबलपुर में 7 अक्टूबर को जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में शादी के लिए आवेदन दिया था। युवती के परिवार को इसकी जानकारी तब मिली, जब एडीएम ऑफिस की ओर से उन्हें &amp;#8216;नो ऑब्जेक्शन&amp;#8217; के लिए नोटिस मिला। स्पेशल मैरिज एक्ट के प्रावधानों के तहत परिवार की ओर से &amp;#8216;नो ऑब्जेक्शन&amp;#8217; मिलना जरुरी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दोनों को पुलिस संरक्षण दी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद युवती के पिता ने बेटी के लापता होनी की शिकायत दर्ज कराई। दोनों को हिंदू संगठनों द्वारा धमकी भी मिली थी। इसके बाद इस जोड़े ने जबलपुर हाई कोर्ट से पुलिस संरक्षण की मांग की। उन्होंने बताया कि वे शादी करना चाहते हैं। वे चार साल से रिलेशनशिप में है और 1 साल से लिव-इन में रह रहे हैं। सिंगल बेंच ने 22 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए युवती से अपने फैसले पर विचार करने को कहा और दोनों को ही पुलिस संरक्षण मुहैया कराई।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Police Station: माता-पिता के रोक-टोक के खिलाफ बच्चों ने थाने में दर्ज कराई FIR</title><link>https://mp.inkhabar.com/crime/police-station-children-lodged-an-fir-in-the-police-station-against-the-interference-of-their-parents/</link><pubDate>August 2, 2024, 4:33 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/seg-300x169.webp</image><category>क्राइम</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जहां माता-पिता पर उनके ही बच्चों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। बच्चों ने पैरेंट्स पर टीवी और मोबाइल नहीं चलाने देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई। दोनों ही ब...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जहां माता-पिता पर उनके ही बच्चों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। बच्चों ने पैरेंट्स पर टीवी और मोबाइल नहीं चलाने देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई। दोनों ही बच्चे पारिवारिक विवाद के चलते अपनी बुआ के साथ रह रहे है। बुआ के साथ 6 महीने रहने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रोक-टोक पर दर्ज कराई शिकायत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इंदौर में 2 बच्चों ने अपने माता-पिता द्वारा टीवी देखने से मना करने और मोबाइल चलाने से रोक-टोक करने पर पुलिस थाने जाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जिसमें से बेटी की उम्र 21 साल और बेटे की उम्र 8 साल है। पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज करते हुए कार्रवाई की। पुलिस ने शिकायत दर्ज करते हुए कोर्ट में चालान पेश कर दिया। इस पूरे प्रकरण में इंदौर हाई कोर्ट ने जिला कोर्ट में ट्रायल पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र में यह पूरी घटना घटी।&lt;br&gt;पूरे मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता धर्मेंद्र चौधरी का कहना है कि हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें यह बताया गया की 25 अक्टूबर साल 2021 को दो बच्चे जिसमें एक बेटा और बेटी थाने पहुंचे थे, जिन्होंने अपने अभिभावक द्वारा&lt;br&gt;मोबाइल देखने, टीवी चलाने और रोज-रोज डांटने की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;माता-पिता के कोर्ट में रखा अपना पक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पुलिस ने इस पूरे मामले में परिजनों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। वही पेरेंट्स के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चालान भी पेश कर दिया। इधर, इस पूरे मामले में इंदौर हाई कोर्ट में केस को चुनौती दी और हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जिला कोर्ट में माता-पिता के खिलाफ शुरू किए गए ट्रायल पर रोक लगा दी। पूरे घटनाक्रम के बाद बच्चे अपनी बुआ के साथ रह रहे है। बता दें कि पिता का भी अपने बहन के साथ विवाद है। वहीं इस पूरे केस में अभिभावक ने भी अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Election : 11 वर्ष बाद एमपी में फिर होंगे समितियों के चुनाव, जानें कब है वोटिंग</title><link>https://mp.inkhabar.com/election/mp-election-after-11-years-committee-elections-will-be-held-again-in-mp-know-when-is-voting/</link><pubDate>June 23, 2024, 10:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/download-13-2-300x169.png</image><category>चुनाव</category><excerpt>भोपाल: आप यह सुन कर अचंभित जरूर हुए होंगे कि 11 साल बाद फिर से एमपी में चुनाव। जी हां, चुनाव तो ऐसे हर पांच साल में होते है, लेकिन मध्य प्रदेश में 11 साल से एक चुनाव बार-बार किसी कारण से टल जा रहा था। सभी समितियां प्रशासक के भरोसे बैठी थीं। अब ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल&lt;/strong&gt;: आप यह सुन कर अचंभित जरूर हुए होंगे कि 11 साल बाद फिर से एमपी में चुनाव। जी हां, चुनाव तो ऐसे हर पांच साल में होते है, लेकिन मध्य प्रदेश में 11 साल से एक चुनाव बार-बार किसी कारण से टल जा रहा था। सभी समितियां प्रशासक के भरोसे बैठी थीं। अब हाई कोर्ट के आदेश पर 11 साल बाद लोगों को गुड न्यूज़ मिली है। सहकारी संस्थाओं के चुनाव के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। प्रदेश सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने 4 फेज में वोटिंग कराने का कार्यक्रम तय किया है। इसके मुताबिक 26 जून से 9 सितंबर तक मतदान होगा। सदस्यता लिस्ट जारी करने के बाद 8, 11, 28 अगस्त और 4 सितंबर को वोटिंग होगी। मतदान के खत्म होते ही काउंटिंग होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे पहले सहकारी समितियों के चुनाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जारी हुई कार्यक्रम के मुताबिक, सबसे पहले प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और विभिन्न संस्थाओं में भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों के मतदान होंगे। इसके आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और अपेक्स बैंक के संचालक मंडल का मतदान होगा। बता दें कि अभी सभी संस्थाओं में प्रशासक नियुक्त हैं, जो हर 5 वर्ष में चुनाव कराने के प्रावधान के विरोध में है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन समितियों के नहीं होंगे&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;चुनाव &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसे में बता दें कि कुछ ऐसे समितियों के चुनाव है जो नहीं हो पाएंगे, जो अलग-अलग वजहों से अपात्र हैं। इसमें खाद-बीज की राशि न चुकाने, गेहूं, धान समेत अन्य उपजों के उपार्जन में गड़बड़ी या अन्य वजहों से अपात्र घोषित संस्थाएं का नाम अंकित हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP High Court: 14 साल की रेप पीड़िता को दी गर्भपात की इजाजत, माता-पिता खर्चों पर खत्म होगी गर्भावस्था</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/mp-high-court-14-year-old-rape-victim-given-permission-for-abortion-pregnancy-will-end-at-parents-expense/</link><pubDate>June 20, 2024, 10:15 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/PIRITA-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली (Singrauli) की स्थानीय निवासी 14 साल की रेप पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। जस्टिस जीएस आहलूवालिया की सिंगल बेंच ने कहा कि माता-पिता अपनी जोखिम औऱ खर्चे के आधार पर रेप पीड़िता का गर्भपात कराए...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली (Singrauli) की स्थानीय निवासी 14 साल की रेप पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। जस्टिस जीएस आहलूवालिया की सिंगल बेंच ने कहा कि माता-पिता अपनी जोखिम औऱ खर्चे के आधार पर रेप पीड़िता का गर्भपात कराएं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि गर्भपात कराने में राज्य सरकार और गर्भपात करने वाले डॉक्टरों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। गर्भपात कराने में यदि पीड़िता को कुछ हो जाता है तो इसका जिम्मेदार अस्पताल या गर्भपात करने वाले डॉक्टर नहीं होंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कई धाराओं में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि सिंगरौली निवासी एक 14 वर्षीय लड़की के अपहरण की रिपोर्ट परिजनों द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने लड़की की बरामदगी के बाद अपहरण, दुराचार और पॉक्सो सहित अन्य धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। याचिका में कहा गया था कि नाबालिग लड़की गर्भवती है और वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है। इसके अलावा वह मानसिक और शारीरिक रूप से भी बच्चे को जन्म देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में पीड़िता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी 14 साल लड़की को गर्भपात कराने की अनुमति दी जाएं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गर्भपात के बाद भ्रूण की जांच की जाएगी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट का कहना है कि रेप पीड़िता का गर्भपात होने के बाद भ्रूण को जांच एजेंसी को सौंप दिया जाए। विवेचना अधिकारी भ्रूण प्राप्त होने के दो दिनों में उसे डीएनए और फिंगर प्रिंट जांच के लिए आगे भेजे। प्रयोगशाला अधिकारी एक महीने में भ्रूण की जांच की रिपोर्ट पेश करें। एकलपीठ ने सिंगरौली के CMHO( मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी।) को निर्देशित किया है कि आवश्यक होने पर पीड़िता का गर्भपात मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में कराया जाए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP High Court: नीट परिक्षा मामले को लेकर आज फिर होगी सुनवाई</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-high-court-hearing-on-neet-exam-case-will-be-held-again-today/</link><pubDate>June 14, 2024, 6:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/mp-court-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट(MP High Court) में नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट फार यूजी यानी नीट-यूजी के रिजल्ट को चुनौती देने वाले मामले में गुरुवार को सुनवाई टल गई थी। जिसकी सुनवाई आज यानि शुक्रवार को होगी। जस्टिस अमरनाथ केशरवानी व जस्टिस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट(MP High Court) में नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट फार यूजी यानी नीट-यूजी के रिजल्ट को चुनौती देने वाले मामले में गुरुवार को सुनवाई टल गई थी। जिसकी सुनवाई आज यानि शुक्रवार को होगी। जस्टिस अमरनाथ केशरवानी व जस्टिस वीरेंद्र द्विवेदी की युगलपीठ ने आज (शुक्रवार को) सुनवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट में दायर मामलों में याचिकाकर्ताओं ने भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिजल्ट में गड़बड़ी की शंका को लेकर की कानूनी कार्रवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भोपाल व जबलपुर निवासी छात्राओं की ओर से दायर मामले में नीट-यूजी परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के रिजल्ट को कठघरे में ला रखा है। टॉप-13 अभ्यर्थियों के रोल नंबर आसपास होने को लेकर सवाल खड़ा किया गया है। आरोप लगाया गया है कि एक ही कोचिंग सेंटर के आठ छात्रों के नाम व रोल नंबर एक सामान हैं। इस आरोप की जांच होनी चाहिए। जबलपुर निवासी अमीषी वर्मा के अधिवक्ता आदित्य संघी व भोपाल की रहने वाली निशिता सोनी के अधिवक्ता ब्रजेन्द्र मिश्रा ने मुताबिक याचिकाकर्ता नीट यूजी परीक्षा 2024 में शामिल हुई थीं। लेकिन जैसे ही परिणाम सामने आया, वह रिजल्ट में गड़बडी की आशंका के साथ कानूनी कार्रवाई के लिए आगे आईं। दरअसल, अमीषी को 720 अंक में से 615 अंक प्राप्त हुए । उसे व्यक्तिगत व विशेषज्ञों की गणना अनुसार रिजल्ट में मिले अंको से अधिक अंक मिलने की उम्मीद थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक समान नाम व रोल नंबर वालों को मिले समान अंक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;याचिका में कहा गया था कि परीक्षा परिणाम में 67 छात्रों को पूरे में पूरे अंक प्राप्त हुए हैं। एक ही कोचिंग संस्थान में 6 छात्रों को शत प्रतिशत अंक व दो को 718 व 719 अंक रिजल्ट में मिले हैं। सभी के नाम व रोल नंबर में एक जैसे है। दरअसल, गलत उत्तर देने पर चार अंक काटे जाते हैं, तो सवाल उठता है कि दो छात्रों को 718 व 719 अंक कैसे मिल सकते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Kareena Kapoor&amp;#8217;s Book : करीना कपूर ख़ान ने पॉपुलर होने के लिए लिखी किताब ! जानें क्यों हो रही चर्चा</title><link>https://mp.inkhabar.com/desh-pradesh/kareena-kapoors-book-kareena-kapoor-khan-wrote-a-book-to-become-popular-know-why-there-is-discussion/</link><pubDate>May 11, 2024, 7:39 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/download-12-300x225.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>भोपाल: बॉलीवुड कि नामी अभिनेत्री करीना कपूर खान अपनी दमदार एक्टिंग और शानदार लुक के लिए हमेशा सुर्ख़ियों में बनी रहती है। (Kareena Kapoor&amp;#8217;s Book) इस वक्त वह एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा हट कर है। बता दें कि अभिनेत्र...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल:&lt;/strong&gt; बॉलीवुड कि नामी अभिनेत्री करीना कपूर खान अपनी दमदार एक्टिंग और शानदार लुक के लिए हमेशा सुर्ख़ियों में बनी रहती है। (Kareena Kapoor&amp;#8217;s Book) इस वक्त वह एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा हट कर है। बता दें कि अभिनेत्री करीना कपूर जब गर्भावस्था में थी, तो उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए एक किताब लिखी जिसका नाम दिया था &amp;#8216;करीना कपूर खान्स प्रेगनेंसी बाइबल।&amp;#8217; हालांकि अब इस पुस्तक के नाम पर हलचल तेज है। इस मामले को लेकर जबलपुर के एक युवक ने अभिनेत्री पर धार्मिक भावनाएं को ठोस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए पुलिस कम्प्लेन दर्ज करवाया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सस्ती पॉपुलैरिटी हासिल करने के लिए किया ऐसा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि जबलपुर के किरश्चन समाजसेवी क्रिस्टोफर एंथोनी ने इस विषय में मामला दर्ज करवाते हुए कहा कि सिर्फ किताब के प्रचार के लिए ही इस प्रकार ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक का नाम टाइटल में रखकर करीना कपूर ने सस्ती पॉपुलैरिटी हासिल करने के लिए यह स्टेप ली है। क्रिस्टोफर एंथोनी का मानना है कि बाइबिल पूरी दुनिया मे ईसाई घर्म की सबसे पवित्र ग्रंथ है और करीना कपूर खान को अपनी प्रेगनेंसी की तुलना बाइबिल से करना शर्मनाक है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं को चोट पहुंची हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मामले में 1 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अब इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने करीना कपूर खान को लीगल समन भेजा है। अब अभिनेत्री करीना कपूर को इस विषय में साबित करना होगा कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाई है। बता दें कि इस मामले में अगली सुनवाई 1 जुलाई को होना है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: हाई कोर्ट के जज ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी हड़काया, कहा- आप तो सुप्रीम…</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/mp-news-high-court-judge-hurled-deputy-collector-anurag-tiwari-said-you-are-the-supreme/</link><pubDate>May 25, 2023, 6:50 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-8-1-300x169.jpg</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट के फैसले की अपने मन मुताबिक व्याख्या कर लेते हैं। इतना ही नहीं, तिवारी ने जब अपने बचाव में तर्क देने की कोशिश की तो जज ने उन्हें चुप करा दिया। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि आप अदालत की बात को ध्यान से सुनें नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जज ने लिखित जवाब में निकाली थी कमियां&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मामला तीन दिन पुराना है। रीवा जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में हाई कोर्ट में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान जज ने तिवारी के लिखित जवाब में कई कमियां निकाल दीं। तिवारी ने अपने जवाब में लिखा था कि हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। इसलिए यथास्थिति बहाल की जानी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जस्टिस अग्रवाल जवाब पर हुए गुस्सा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जवाब देखते ही जस्टिस अग्रवाल का पारा चढ़ गया। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि खारिज करने का मतलब समझते हैं आप। यदि कोर्ट ने अपील खारिज कर दी तो आदेश में यह क्यों लिखा कि 90 दिन के अंदर दूसरे पक्ष को सफाई का मौका दें। लगता है कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं। आप हाई कोर्ट के आदेश की भी अपने हिसाब से व्याख्या कर लेते हैं। जज ने यह भी कहा कि आप लोक सेवा आयोग के जरिए इस पद पर आए हैं। इतनी जानकारी आपको होनी चाहिए कि रद्द करने का क्या मतलब होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलेक्टर अनुराग तिवारी ने प्रक्रिया को लेकर किया सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जस्टिल अग्रवाल इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि हाई कोर्ट के नोटिस की तामील हुई या नहीं। इस पर तिवारी ने जवाब दिया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। यह सुनकर जस्टिस अग्रवाल फिर भड़क गए। उन्होंने पूछा कि इसमें प्रक्रिया क्या होती है। डिप्टी कलेक्टर ने अपने बचाव में कुछ कहने की कोशिश की तो जज ने नसीहत दी कि आप सोच-समझकर बोलें और कोर्ट का आदेश ध्यान से सुनें, नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: हाई कोर्ट ने डॉक्टरों को लगाई फटकार, हड़ताल ली वापस</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-news-high-court-reprimanded-the-doctors-called-off-the-strike/</link><pubDate>May 4, 2023, 6:48 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-2023-05-04T121544.650-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल को वापस ले लिया है। डॉक्टरों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम पर लौटने का निर्णय ले लिया है। मध्य प्रदेश शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने इसकी पुष्टि की है। उन्हों...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल को वापस ले लिया है। डॉक्टरों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम पर लौटने का निर्णय ले लिया है। मध्य प्रदेश शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का हम आदर करते हैं। MP में हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताया और कहा कि तत्काल काम पर लौटे. पूरे प्रदेश भर में 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर्स हड़ताल कर रहे थे. जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. ग्वालियर में इलाज न मिलने की वजह से एक मरीज की मौत का मामला भी सामने आया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई कोर्ट ने फटकारा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में जारी डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर तत्काल काम पर लौट जाएं. डॉक्टर अस्पताल में मौजूद मरीजों का भी इलाज करें. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से बिना अनुमति हड़ताल न करें. भविष्य में टोकन स्ट्राइक को भी हाईकोर्ट ने अवैध ठहराया है. याचिका पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुंवर पाल सिंह ने लगाई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हड़ताल पर सख्ती दिखाई. जिसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल को वापस ले लिया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हड़ताल का मरीजों पर पड़ा प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मध्यप्रदेश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर बुधवार से हड़ताल पर चले गए थे. हड़ताल का असर भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दिखाई दिया. गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं. हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती 228 मरीजों के ऑपरेशन बुधवार को टाल दिए गए हैं. कई जगह आयुष कर्मचारियों के भरोसे ही अस्पताल छोड़ दिया गया. मरीजों को इस हड़ताल से खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>हाईकोर्ट को मिले 7 नए न्यायाधीश, सोमवार को दिलजाएगा शपत</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/high-court-gets-7-new-judges-will-take-oath-on-monday/</link><pubDate>April 30, 2023, 4:18 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/download-6-2-300x150.png</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नए सात न्यायाधीश सोमवार को शपत लेंगे। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमथ सोमवार को उच्च न्यायालय के सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाएंगे। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रामकुमार चौबे ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल:&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नए सात न्यायाधीश सोमवार को शपत लेंगे। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमथ सोमवार को उच्च न्यायालय के सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाएंगे। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रामकुमार चौबे के अनुसार सात नए न्यायाधीशों के जुड़ जाने से न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। आपको बता दे कि मध्य प्रदेश में न्यायधीशों की स्वीकृत संख्या 53 है नए न्यायाधीशों के आने के बाद भी स्वीकृत संख्या पूरी नहीं होगी।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सोमवार को होगा सप्तग्रहण&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;उच्च न्यायालय के प्रशासनिक आदेश के अनुसार सात नए न्यायाधीशों के नाम हैं, रूपेश चंद्र वार्ष्णेय, अनुराधा शुक्ला, संजीव सुधाकर कलगांवकर, प्रेम नारायण सिंह, अचल कुमार पालीवाल, हिरदेश और अवनींद्र कुमार सिंह।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने कहा- नर्सिंग का &amp;#8216;N&amp;#8217; न पता होने वाले को भी परीक्षा की परमिशन</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/madhya-pradesh-the-high-court-said-those-who-do-not-know-the-n-of-nursing-are-also-allowed-to-take-the-exam/</link><pubDate>April 27, 2023, 1:59 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-81-300x169.jpg</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बार फिर नर्सिंग कॉलेज की परीक्षा पर रोक हटाने से मना कर दिया है. ग्वालियर बेंच के जस्टिस रोहित आर्या और जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को तीखी टिप्पणी की है कि कई नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं, ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बार फिर नर्सिंग कॉलेज की परीक्षा पर रोक हटाने से मना कर दिया है. ग्वालियर बेंच के जस्टिस रोहित आर्या और जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को तीखी टिप्पणी की है कि कई नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं, जिन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला है. इसी वजह से वे कॉलेज चला रहे हैं और समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं. हमें हैरानी हो रही है कि ऐसे लोगों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई, जिन्हें नर्सिंग का &amp;#8216;एन&amp;#8217; भी नहीं मालूम.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट ने अब सीबीआई के जांच अधिकारी को किया तलब&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने अब सीबीआई के जांच अधिकारी को भी तलब कर दिया है. दरअसल, नर्सिंग परीक्षा पर लगी रोक हटवाने के लिए राज्य सरकार, मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल और मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की तरफ से जमकर पैरवी की गई, लेकिन उनकी कोई भी दलील हाई कोर्ट में नहीं सुनी गई. मंगलवार को जस्टिस रोहित आर्या और जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह उपस्थित हुए थे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि एमपीएनआरसी ने सत्र 2022-23 के लिए सभी 485 कॉलेजों का निरीक्षण किया है. इसके बाद ही मान्यता देने की प्रक्रिया पूरी हुई. इसकी रिपोर्ट तैयार कर पेन ड्राइव में दी गई है. हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हम एमपीएनआरसी पर भरोसा नहीं करते है उनका रिकॉर्ड बहुत खराब स्थिति में है. अगर ये पहले इतनी ईमानदारी से काम करते तो आज यह स्थिति नहीं बनती. कोर्ट ने कहा कि कुछ सीमाएं हैं, जिन्हें हम लांघना नहीं चाहते.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि पिछली दो सुनवाई में कोर्ट की मंशा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वयं अधिकारियों को बुलाकर एक-एक दस्तावेज का परीक्षण किया है. महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में कुल 485 नर्सिंग कॉलेजों में करीब 20 हजार छात्र हैं. इनमें से 440 कॉलेज पुराने हैं. शेष 45 को पहली बार मान्यता दी गई है. सीबीआई जांच के दायरे से लगभग 130 कॉलेज बाहर हैं. शेष सभी कॉलेजों से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो रही है. कोर्ट ने कहा कि आप इस केस से अभी जुड़े हैं. बीते दो से तीन सालों में इन लोगों ने इस मामले में क्या तमाशे किए हैं, आपको नहीं बताया गया. कोर्ट ने कहा कि हमारी चिंता दूसरी है जिस प्रदेश में एक बार धांधली हो चुकी है, हम वहां पर उन्हीं लोगों से कहें कि आप परीक्षा ले लो, तो सीधे से बात निगली नहीं जा सकती. ये ध्यान रहे कि हम ये सब पब्लिसिटी के लिए नहीं, बल्कि आमजन के हित के लिए कर रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एडवोकेट दिलीप कुमार शर्मा ने दो नोटिफिकेशन को दी थी चुनौती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरसअल, एडवोकेट दिलीप कुमार शर्मा ने एक जनहित याचिका दायर करते हुए मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के उन दो नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी, जिसके आधार पर 100 से अधिक कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को सत्र 2019-20 और 2020-21 के लिए संबद्धता प्रदान की गई. 27 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने बीएससी (नर्सिंग) और पोस्ट बेसिक बीएससी परीक्षा पर अंतरिम रोक लगा दी और यूनिवर्सिटी से जवाब तलब किया था. पिछली सुनवाई के दौरान भी मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी,जबलपुर द्वारा नर्सिंग कॉलेजों को बैकडेट से संबद्धता देने पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के जस्टिस रोहित आर्या और जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने सख्त नाराजगी जताई थी.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP Breaking: जबलपुर हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी विनायक वर्मा को सस्पेंड करने आदेश लिया वापस</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-breaking-jabalpur-high-court-withdraws-order-suspending-chhindwara-sp-vinayak-verma/</link><pubDate>April 13, 2023, 8:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-11-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल। जबलपुर हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी विनायक वर्मा को सस्पेंड करने के आदेश वापस ले लिया है। एसपी वर्मा ने गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश होकर माफी मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश वापस ले लिया। उनके अलावा NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी हा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;जबलपुर हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी विनायक वर्मा को सस्पेंड करने के आदेश वापस ले लिया है। एसपी वर्मा ने गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश होकर माफी मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश वापस ले लिया। उनके अलावा NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी हाईकोर्ट में पेश हुए। जिसके बाद उनका भी अरेस्ट वारंट वापस हो गया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: एसपी विनायक वर्मा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से मिला सस्पेंड ऑर्डर, भूमि अधिग्रहण पर 19 अप्रैल हो होगी सुनवाई</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-news-sp-vinayak-verma-gets-suspend-order-from-madhya-pradesh-high-court-hearing-on-land-acquisition-will-be-held-on-april-19/</link><pubDate>April 13, 2023, 6:46 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-9-1-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना से संबंधित एक मामले में छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक विनायक वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने अवमानना के मामले में प्रतिवादी को कोर्ट में पेश न करने पर छिंदवाड़ा एसपी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना से संबंधित एक मामले में छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक विनायक वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने अवमानना के मामले में प्रतिवादी को कोर्ट में पेश न करने पर छिंदवाड़ा एसपी के व्यवहार पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने मध्य प्रदेश के डीजीपी को आदेश दिए हैं कि छिंदवाड़ा एसपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए और अब प्रतिवादी के विरूद्ध वारंट तामीली की जिम्मेदारी हाई कोर्ट की होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या था मामला?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि छिंदवाड़ा जिले में स्थित तुलसी नारायण संकीर्तन मंडल की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि एनएचएआई ने मंदिर की 1254 वर्ग जमीन का अधिग्रहण कर लिया था. जमीन कब्ज़ा करने के बावजूद भी मुआवजा नहीं दिया गया था. इसके खिलाफ तुलसी रामायण संकीर्तन मंडल ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. एमपी हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद मुआवजा देने के आदेश जारी किए थे. लेकिन इसके बावजूद भी एनएचएआई द्वारा सिर्फ 636 वर्ग फीट का मुआवजा ही प्रदान किया गया. हाईकोर्ट ने अगस्त 2018 में बाकी बचे 618 वर्ग फ़ीट जमीन का मुआवजा देने के निर्देष देते हुए याचिका को हटा दिया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;19 अप्रैल को होगी सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चीफ जस्टिस रवि मलिमठ की युगलपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को लिखे गये पत्र में जमानती वारंट तामील नहीं होने की वजह अधिकारी के स्थानातंरण को बताया है. इससे हम नाराज हैं और ऐसा लग रहा है कि हमारे आदेशों को गंभीर रूप से नहीं लिया जा रहा है. युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना को निर्देश दिए कि छिंदवाड़ा एसपी विनायक वर्मा को मामले पर फैसला आने तक निलंबित कर दिया जाए.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: स्वास्थ्य सहायक प्रबंधक पदों पर नियुक्तियां रहेगी हाईकोर्ट आदेश के अधीन</title><link>https://mp.inkhabar.com/national/mp-news-appointments-to-the-posts-of-health-assistant-manager-will-be-subject-to-high-court-order/</link><pubDate>March 18, 2023, 3:03 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/03/Clipboard-18-300x169.jpg</image><category>देश</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा स्वास्थ्य सहायक प्रबंधक पदों पर की जाने वाली नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने पीएससी, स्वास्थ्य एवं परिवार क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा स्वास्थ्य सहायक प्रबंधक पदों पर की जाने वाली नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने पीएससी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य आयुक्त, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इनकी ओर से दर्ज हुई याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि ये मामले सीहोर निवासी जूही ताम्रकार, टीकमगढ़ निवासी विनीता नाग समेत अन्य की ओर से दाखिल किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि योग्यता होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार देने से वंचित किया गया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि पीएससी ने 7 जुलाई 2021 को स्वास्थ्य सहायक प्रबंधक के 64 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया था। इसके लिए पीजी के साथ डिप्लोमा इन हॉस्पिटल मैनेजमेंट करना जरुरी था। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा दी और सफल हुए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;28 फरवरी 2023 को अयोग्य करार दिया था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दायर याचिका के तहत सभी योग्यताएं होने के बावजूद उन्हें 28 फरवरी 2023 को अयोग्य करार दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने एक मार्च को संबंधित विभागों में अभ्यावेदन पेश कर बताया कि उनके पास निर्धारित योग्यता के साथ अतिरिक्त योग्यता भी है। जब इस मामले को लेकर कोई सुनवाई नहीं की गई तो हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई। इतना ही नहीं न्यायालय को बताया गया कि उक्त पदों के लिए 20 मार्च से इंटरव्यू होने हैं। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक शाह ने अपना पक्ष रखा।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>