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       <title>Today mp high court news News | Latest mp high court news News | Breaking mp high court news News in English | Latest mp high court news News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का mp high court news समाचार:Today mp high court news News ,Latest mp high court news News,Aaj Ka Samachar ,mp high court news समाचार ,Breaking mp high court news News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>MP News: हाई कोर्ट के जज ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी हड़काया, कहा- आप तो सुप्रीम…</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/mp-news-high-court-judge-hurled-deputy-collector-anurag-tiwari-said-you-are-the-supreme/</link><pubDate>May 25, 2023, 6:50 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-8-1.jpg</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट के फैसले की अपने मन मुताबिक व्याख्या कर लेते हैं। इतना ही नहीं, तिवारी ने जब अपने बचाव में तर्क देने की कोशिश की तो जज ने उन्हें चुप करा दिया। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि आप अदालत की बात को ध्यान से सुनें नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जज ने लिखित जवाब में निकाली थी कमियां&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मामला तीन दिन पुराना है। रीवा जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में हाई कोर्ट में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान जज ने तिवारी के लिखित जवाब में कई कमियां निकाल दीं। तिवारी ने अपने जवाब में लिखा था कि हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। इसलिए यथास्थिति बहाल की जानी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जस्टिस अग्रवाल जवाब पर हुए गुस्सा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जवाब देखते ही जस्टिस अग्रवाल का पारा चढ़ गया। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि खारिज करने का मतलब समझते हैं आप। यदि कोर्ट ने अपील खारिज कर दी तो आदेश में यह क्यों लिखा कि 90 दिन के अंदर दूसरे पक्ष को सफाई का मौका दें। लगता है कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं। आप हाई कोर्ट के आदेश की भी अपने हिसाब से व्याख्या कर लेते हैं। जज ने यह भी कहा कि आप लोक सेवा आयोग के जरिए इस पद पर आए हैं। इतनी जानकारी आपको होनी चाहिए कि रद्द करने का क्या मतलब होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलेक्टर अनुराग तिवारी ने प्रक्रिया को लेकर किया सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जस्टिल अग्रवाल इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि हाई कोर्ट के नोटिस की तामील हुई या नहीं। इस पर तिवारी ने जवाब दिया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। यह सुनकर जस्टिस अग्रवाल फिर भड़क गए। उन्होंने पूछा कि इसमें प्रक्रिया क्या होती है। डिप्टी कलेक्टर ने अपने बचाव में कुछ कहने की कोशिश की तो जज ने नसीहत दी कि आप सोच-समझकर बोलें और कोर्ट का आदेश ध्यान से सुनें, नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: हाई कोर्ट ने PFI के 19 सदस्यों की जमानत याचिका को किया रद्द, आरोपियों ने दिए थे ये तर्क</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mp-news-the-high-court-canceled-the-bail-plea-of-19-members-of-pfi-the-accused-had-given-these-arguments/</link><pubDate>April 26, 2023, 4:53 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-77-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जबलपुर। प्रतिबंधित संगठन PFI जमील समेत 19 आरोपियों ने अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। जबकि प्रतिबंधित संगठन के एक अन्य सदस्य अब्दुल रूउफ द्वारा मेडिकल ग्राउंड के आधार पर याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस डी के पालीवार ने सुनवाई...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जबलपुर। &lt;/strong&gt;प्रतिबंधित संगठन PFI जमील समेत 19 आरोपियों ने अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। जबकि प्रतिबंधित संगठन के एक अन्य सदस्य अब्दुल रूउफ द्वारा मेडिकल ग्राउंड के आधार पर याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस डी के पालीवार ने सुनवाई के बाद दोनों जमानत याचिकाओं को रद्द कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;19 सदस्यों ने गिरफ्तारी के खिलाफ दायर की थी याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि जेल में बंद पीएफआई के 19 सदस्यों की ओर से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उनकी गिरफ्तारी में विधि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। जिसके खिलाफ उन्होंने अपील की है। इसके अलावा उनके विरूद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया गया है। याचिका में कहा गया था कि विधि प्रक्रिया के पालन नहीं किये जाने के संबंध में दायर याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं होता है, तब तक उन्हें अंतरित जमानत का लाभ प्रदान किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उप महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राज्य शासन की तरफ से उप महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह व शासकीय अधिवक्ता प्रदीप गुप्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का मेंबर हैं। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से आपत्ति जनक सामग्री पाई गई है। वे देश के विरूद्ध युद्ध और संविधान का विरोध कर रहे हैं। एसटीएफ व एटीएस ने जांच के उपरांत बीते वर्ष सितम्बर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। देशद्रोह सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत उनके खिलाफ अपराध दर्ज है। विधि प्रक्रिया को चुनौती देना जमानत का आधार कदा भी नहीं है। एकलपीठ को बताया गया कि जेल में अब्दुल रूउफ को मेडिकल सुविधा दी जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से कहा कि उन्हें ऐसी कोई गंभीर बीमारी नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;याचिकाकर्ताओं ने दिए तर्क&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि प्रकरण में आरोपियों से रिमांड अवधि में पूछताछ हो चुकी है। वे बहुत दिनों से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। इसलिए उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद दोनों जमानत याचिकाओं को रद्द कर दिया।&lt;/p&gt;
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