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       <title>Today Dussehra 2023 date News | Latest Dussehra 2023 date News | Breaking Dussehra 2023 date News in English | Latest Dussehra 2023 date News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Dussehra 2023 date समाचार:Today Dussehra 2023 date News ,Latest Dussehra 2023 date News,Aaj Ka Samachar ,Dussehra 2023 date समाचार ,Breaking Dussehra 2023 date News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        <copyright>MP Inkhabar</copyright>
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        </image><item><title>MP News : इस गांव के लोग करते है रावण की पूजा, जय लंकेश से होता है शुभारंभ</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/mp-news-people-of-this-village-worship-ravana-it-starts-with-jai-lankesh/</link><pubDate>October 24, 2023, 2:01 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/13.png</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। दशहरे पर रावण दहन की मान्यता है कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई के जीत के तौर पर रावण का पुतला जलाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा गांव है, जहां लंकापति रावण की पूजा होती है। कहा जाता है कि यहां रावण का गांव स...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;दशहरे पर रावण दहन की मान्यता है कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई के जीत के तौर पर रावण का पुतला जलाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा गांव है, जहां लंकापति रावण की पूजा होती है। कहा जाता है कि यहां रावण का गांव स्थित है। यहां के लोग रावण को न सिर्फ भगवान की तरह पूजते हैं, बल्कि दशहरे के दिन रावण दहन के बजाय रावण की पूजा-अर्चना करते हैं। बता दें कि रावण का यह गांव विदिशा जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर मौजूद है। यहां के लोग रावण का पूजन करते हैं, इसके अलावा पूरे गांव के लोग अपने आप को रावण बाबा का वंशज मानते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ईष्ट देवता हैं रावण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;विदिशा जिले के लोग रावण को रावण बाबा कहते है। गांव के निवासी रावण को ईष्ट और कुलदेवता मानते हैं। यहां के लोग कोई भी काम शुरु करने से पहले रावण की मूर्ति के सामने प्रणाम करते है। गांव में लोग दशहरा बड़े ही धूम-धाम से मनाते तो हैं, लेकिन रावण दहन नहीं करते हैं। यहां के सभी वाहनों मे जय लंकेश लिखा हुआ मिलता है। यही नहीं अगर वाहन पर जय लंकेश नहीं लिखा होता तो वह वाहन नहीं चलाया जाता है। यहां जीप, मोटरसाइकिल ,ट्रैक्टर या ट्रॉली तब तक नहीं चलाया जाता है जब तक उन पर जय लंकेश न लिखा गया हो।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मन्दिर के पीछे की मान्यता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अलावा यहां ये मान्यता है कि रावण बाबा के मंदिर से उत्तर दिशा में तीन किमी की दूरी पर एक बूधे की पहाड़ी स्थित है। इस पहाड़ी पर प्राचीन काल में बुद्ध नामक एक राक्षस रहा करता था और रावण से लड़ाई करने की भावना रखता था। वह जब भी लंका पहुंचता तो वहां की चकाचौंध देखकर खुश हो जाता और उसका गुस्सा भी शांत हो जाता था। एक दिन रावण ने उस राक्षस से पूछा तुम मेरे दरबार में आते हो और हर बार बिना कुछ बताये चले जाते हो। इस पर राक्षस ने कहा महाराज मैं हर बार आपसे युद्ध करने का मन बना कर आता हूं, लेकिन आपको देख कर मेरा गुस्सा शांत हो जाता है। तब रावण ने कहा कि तुम कहीं मेरी एक मूर्ति बना लेना और उसी से लडाई लड़ना। यह माना जाता है कि तभी से यह प्रतिमा यहां बनी हुई है। लोगों ने उस प्रतिमा की महिमा को देखते हुए वहां रावण बाबा का मंदिर बना दिया। बता दें कि यहां पर लोगों का इससे विश्वास जुड़ा हुआ है। आज भी जब कोई नया वाहन घर लाता है तो उस पर रावण बाबा का नाम जरूर लिखवाता है और रावण की धूम-धाम से पूजा करता है।&lt;/p&gt;
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