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       <title>Today सुप्रीम कोर्ट News | Latest सुप्रीम कोर्ट News | Breaking सुप्रीम कोर्ट News in English | Latest सुप्रीम कोर्ट News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का सुप्रीम कोर्ट समाचार:Today सुप्रीम कोर्ट News ,Latest सुप्रीम कोर्ट News,Aaj Ka Samachar ,सुप्रीम कोर्ट समाचार ,Breaking सुप्रीम कोर्ट News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.mp.inkhabar.com/tag/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
        <lastBuildDate>May 4, 2026, 1:28 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.mp.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>बुलडोजर एक्शन को लेकर मोहन यादव का बड़ा ऐलान, कहा-हमेशा मना…</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/mohan-yadavs-big-announcement-regarding-bulldozer-action-said-always-refuse/</link><pubDate>September 23, 2024, 4:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-5.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल: देश के कई भाजपा शासित प्रदेशों में आरोपियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की गई है. हालांकि, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुलेआम कह चुके हैं कि उन्हें यह संस्कृति पसंद नहीं है. सीएम यादव ने कहा कि वह कभी भी बुल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल:&lt;/strong&gt; देश के कई भाजपा शासित प्रदेशों में आरोपियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की गई है. हालांकि, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुलेआम कह चुके हैं कि उन्हें यह संस्कृति पसंद नहीं है. सीएम यादव ने कहा कि वह कभी भी बुलडोजर एक्शन के पक्ष में नहीं रहे हैं. सीएम यादव ने यह भी कहा कि वह हमेशा इसके लिए मना ही करते आए हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इंटरव्यू के दौरान खुलासा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। सीएम यादव का यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने बुलडोजर मामले को गलत बताते हुए इस पर लगाम लगा दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 1 अक्टूबर 2024 तक बिना अनुमति के कोई भी बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, इसमें सार्वजनिक स्थान, रास्ते और रेलवे ट्रैक का मामला शामिल नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एमपी में कई बार बुलडोजर कार्रवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;याद हो कि, वर्ष 2023 में मोहन यादव की सरकार बनने के बाद कई बार ऐसा हुआ है कि आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलवाया गया है। इस दौरान कई आरोपियों के अवैध संपत्ति पर भी बुलडोजर की कार्रवाई की गई है। बता दें कि भाजपा कार्यकर्ता के हाथ काटने वाले आरोपी के घर भी ढहाई जा चुकी है। हालांकि इस मामले में सीएम यादव का कहना है कि उन्हें बुलडोजर कार्रवाई पसंद नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बुलडोजर मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अवैध तोड़फोड़ के मामले संविधान के मूल्यों के खिलाफ जाते हैं. यह आदेश उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई राज्यों में आरोपियों की संपत्तियां ध्वस्त की जा रही हैं. यह भी आरोप लगाए गए कि सिर्फ एक धर्म विशेष के आरोपियों के घर तोड़े जा रहे हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: कूनो में चीतों की मौत पर सुनवाई बंद, केंद्र सरकार को मिली राहत</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/hearing-closed-on-the-death-of-cheetahs-in-kuno-the-central-government-got-relief/</link><pubDate>August 8, 2023, 1:25 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/Clipboard-79-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही चीतों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि चीतों को देश में बसाने में कुछ समस्याएं जरूर हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल. &lt;/strong&gt;मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही चीतों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि चीतों को देश में बसाने में कुछ समस्याएं जरूर हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की दलील को स्वीकार करते हुए अब इस मामले की सुनवाई बंद कर दी है. बता दें कि कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए ये भी कहा कि भारत में चीतों को बसाने के प्रोजेक्ट पर सरकार से सवाल पूछने का कोई कारण अब बचा नहीं है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र सरकार ने ये कहा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि चीतों को बसाने के लिए बहुत सारी तैयारी की गई है. हर साल करीब 12 से 14 चीतों को लाया जाएगा. कुछ समस्याएं हैं लेकिन चिंताजनक जैसा कुछ भी नहीं है. वहीं चीतों की मौत को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने चीतों पर इस्तेमाल की गई रेडियो कॉलर को भी कारण माना है. जबकि सरकार ने आरोपों को वैज्ञानिक सबूत के बिना और अफवाह के रुप में इसे खारिज कर दिया. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र के बयानों पर अविश्वास करने का कोई दूसरा कारण नहीं मिला. कोर्ट ने कहा कि इस परियोजना को न्यायपालिका के बजाय क्षेत्र के विशेषज्ञों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से किया आग्रह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये केंद्र का विशेषाधिकार है कि वो विशेषज्ञों की राय को शामिल करे या नहीं. जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की पीठ ने आदेश में कहा कि 11 एक्सपर्ट कमेटी काम कर रही है. इनमें चार विशेषज्ञ भी है. एक विशेषज्ञ प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है कि दुनिया भर में चीता संरक्षण के विशेषज्ञों से सलाह नहीं ली जा रही है. कोर्ट ने कहा कि किस विशेषज्ञ की राय को शामिल किया जाए ये केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है. हम आग्रह करते हैं कि सरकार विशेषज्ञों की राय पर भी विचार करें.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय पार्क में एक साल के भीतर नौ चीतों की मौत हुई है. उनमें तीन शावक भी शामिल हैं. कूनो में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 वयस्क चीतों को लाया गया था. तब से वहां चार शावकों का जन्म हो चुका है. 1952 में चीते देश से विलुप्त हो गए थे. चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों को फिर से मध्य प्रदेश के कूनो में बसाने की योजना शुरू की गई है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया हलफनामा, कुनो में चीतों के मौत की बताई वजह</title><link>https://mp.inkhabar.com/top-news/the-government-presented-an-affidavit-in-the-supreme-court-stating-the-reason-for-the-death-of-cheetahs-in-kuno/</link><pubDate>August 2, 2023, 3:36 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/Untitled-design-18-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>भोपाल. मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में चीतों की मौतों को लेकर लगातार तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. अब इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय और नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. इस एफिडेबिट...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल.&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में चीतों की मौतों को लेकर लगातार तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. अब इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय और नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. इस एफिडेबिट में कूनो में हो रही चीतों की मौत की साइंटिफिक वजह बताई गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मौत की वजह प्राकृतिक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि चीतों की मौत की वजह प्राकृतिक है. इनमें से किसी भी चीतों की मौत अप्राकृतिक वजहों से नहीं हुई है. हलफनामे में ये भी हवाला दिया गया कि किसी चीते की मौत शिकार, जहर, करंट लगने या सड़क पर किसी हादसे की वजह से नहीं हुई है. कूनो में किसी भी अनुपयुक्त कारणों की वजह से चीतों की मौत नहीं हुई है. वहीं चीतों की मौत को लेकर एक बड़ा साइंटिफिक कारण भी बताया गया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;साइंटिफिक कारण भी है मौत की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में बताया गया है कि सामान्य साइंटिफिक अवेयरनेस यह कहता है कि इकोसिस्टम का अभिन्न हिस्सा कहे जाने वाले चीतों, खासकर एडल्ट चीतों में 50 प्रतिशत चीतों का सर्वाइवल रेट काफी कम है. NTCA ने अदालत को बताया कि 15 एडल्ट चीते और भारत में जन्मा एक शावक अभी भी वहां रह रहा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रोजेक्ट चीता पर चल रहा काम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि कूनो में रह रहे चीतों पर ध्यान रखा जा रहा है और एहतिहात के तौर पर उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया जा रहा है. हलफनामे में कहा गया है कि पांच एडल्ट चीतों और तीन शावकों की कूनो नेशनल पार्क में मौत परेशान करने वाला है, लेकिन यह ज्यादा अनावश्यक रूप से चिंताजनक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में ये जानकारी दी गई है कि वाइल्डलाइफ, वन, सोशल साइंस, इकोलॉजी, पशु विज्ञान और अन्य विभागों की एक स्टेयरिंग कमेटी प्रोजेक्ट चीता पर काम कर रही है और इसे मॉनिटर भी कर रही है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: हाई कोर्ट के जज ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी हड़काया, कहा- आप तो सुप्रीम…</title><link>https://mp.inkhabar.com/states/mp-news-high-court-judge-hurled-deputy-collector-anurag-tiwari-said-you-are-the-supreme/</link><pubDate>May 25, 2023, 6:50 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-8-1-300x169.jpg</image><category>राज्य</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल।&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर की जमकर क्लास लगा दी। जस्टिस अग्रवाल ने डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी से कहा कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं क्योंकि आप हाई कोर्ट के फैसले की अपने मन मुताबिक व्याख्या कर लेते हैं। इतना ही नहीं, तिवारी ने जब अपने बचाव में तर्क देने की कोशिश की तो जज ने उन्हें चुप करा दिया। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि आप अदालत की बात को ध्यान से सुनें नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जज ने लिखित जवाब में निकाली थी कमियां&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मामला तीन दिन पुराना है। रीवा जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अनुराग तिवारी एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में हाई कोर्ट में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान जज ने तिवारी के लिखित जवाब में कई कमियां निकाल दीं। तिवारी ने अपने जवाब में लिखा था कि हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। इसलिए यथास्थिति बहाल की जानी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जस्टिस अग्रवाल जवाब पर हुए गुस्सा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जवाब देखते ही जस्टिस अग्रवाल का पारा चढ़ गया। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि खारिज करने का मतलब समझते हैं आप। यदि कोर्ट ने अपील खारिज कर दी तो आदेश में यह क्यों लिखा कि 90 दिन के अंदर दूसरे पक्ष को सफाई का मौका दें। लगता है कि आप तो सुप्रीम कोर्ट हो गए हैं। आप हाई कोर्ट के आदेश की भी अपने हिसाब से व्याख्या कर लेते हैं। जज ने यह भी कहा कि आप लोक सेवा आयोग के जरिए इस पद पर आए हैं। इतनी जानकारी आपको होनी चाहिए कि रद्द करने का क्या मतलब होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलेक्टर अनुराग तिवारी ने प्रक्रिया को लेकर किया सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जस्टिल अग्रवाल इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से पूछा कि हाई कोर्ट के नोटिस की तामील हुई या नहीं। इस पर तिवारी ने जवाब दिया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। यह सुनकर जस्टिस अग्रवाल फिर भड़क गए। उन्होंने पूछा कि इसमें प्रक्रिया क्या होती है। डिप्टी कलेक्टर ने अपने बचाव में कुछ कहने की कोशिश की तो जज ने नसीहत दी कि आप सोच-समझकर बोलें और कोर्ट का आदेश ध्यान से सुनें, नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>दो महीने के अंदर तीन अफ्रीकी चीतों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, सरकार से मांगा जबाब</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/supreme-court-worried-over-the-death-of-three-african-cheetahs-within-two-months-sought-answers-from-the-government/</link><pubDate>May 19, 2023, 8:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-4-3-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>भोपाल: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में पिछले दो महीने में तीन चीतों के मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने कहा कि एक्सपर्ट रिपोर्ट से लगता है कि चीतों की बड़ी आबादी के लिए कूनो में पर्याप्त स्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल: &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में पिछले दो महीने में तीन चीतों के मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने कहा कि एक्सपर्ट रिपोर्ट से लगता है कि चीतों की बड़ी आबादी के लिए कूनो में पर्याप्त स्थान और संसाधन नहीं हैं, इसलिए केंद्र सरकार काे दूसरे पार्क या सेंचुरी में चीतों की शिफ्टिंग पर विचार करना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने वन्यजीव विशेषज्ञ समिति को अगले 15 दिन के अंदर चिता टास्क फोर्स को सुझाव देने के निर्देश दिए।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;SC: चीतों को दूसरे राज्य में शिफ्ट क्यों नहीं कर रहे&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने पूछा की आप राजस्थान में चीतों के लिए जगह क्यों नहीं देख रहें ? केवल इसलिए कि वहां पर विपक्षी पार्टी की सरकार है। केंद्र सरकार कि तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि चीता टास्क फोर्स मौत के कारणों और इन्हें दूसरी सेंचुरी में शिफ्ट करने के पहलुओं की जांच की जा रही है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नामीबिया से लाए गए थे चीते&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;देश से विलुप्त हो चुके चीतों को फिर आबाद करने के लिए लगभग 70 साल बाद नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे। आपको बता दे कि ये चीते नामीबिया &amp;#8216;ने भारत को तोहफे के रूप में दिया था। नामीबिया के आलावा साउथ अफ्रीका से भी 12 चीते भारत लाए गए है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: बी.एड में 75 प्रतिशत आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में मिली चुनौती, कहा- सीटों की संख्या दोबारा निर्धारित हो</title><link>https://mp.inkhabar.com/national/mp-news-75-percent-reservation-in-b-ed-was-challenged-in-the-supreme-court-said-the-number-of-seats-should-be-re-determined/</link><pubDate>April 30, 2023, 1:45 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-49-300x169.jpg</image><category>देश</category><excerpt>भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार को बी.एड कोर्स में बनाई गई पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की डबल बेंच ने बीएड कोर्स में एडमिशन के लिए मध्य प्रदेश राज्य के निवासियों को 75 प्रतिशत आरक्षण देन...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;मध्य प्रदेश सरकार को बी.एड कोर्स में बनाई गई पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की डबल बेंच ने बीएड कोर्स में एडमिशन के लिए मध्य प्रदेश राज्य के निवासियों को 75 प्रतिशत आरक्षण देने की नीति की पड़ताल करने का निर्देश जारी किया है. बेंच ने इस नीति को &amp;#8216;आरक्षण का ओवरडोज&amp;#8217; और असंवैधानिक कहा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट में मिली चुनौती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वीणा वादिनी समाज कल्याण विकास समिति की जनहित याचिका पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों के आंकड़ों का निरिक्षण करने से पता चलता है कि यह लक्षित उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार की इस आरक्षण नीति का समर्थन करते हुए अपना फैसला सुनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बेंच- जमीनी हकीकत रखना चाहिए ख्याल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा है कि राज्य ने निवासियों के लिए सीटों का आरक्षण अपने अधिकारों के दायरे में रहकर तो किया है, लेकिन ऐसा करते समय उसे जमीनी हकीकत का भी ख्याल रखना चाहिए था. आगे कहा कि अगले अकादमिक सत्र से राज्य के स्थानीय निवासियों और बाकी देशवासियों के लिए सीट की संख्या फिर से निर्धारित होनी चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट- अनुच्छेद 14 का हो रहा उल्लंघन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षण की परमिशन है. फिर भी कुल सीटों का तीन चौथाई यानी 75 प्रतिशत तक आरक्षण अनुचित है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी प्रदीप जैन बनाम सरकार मामले में कोर्ट इसे असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) का उल्लंघन करने वाला बता चुका है. बता दें कि राज्य की नीति के मुताबिक बीएड की 75 प्रतिशत सीटें मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए आरक्षित हैं और सिर्फ 25 प्रतिशत सीट अन्य राज्यों के लोगों के लिए बचती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MP News: गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई</title><link>https://mp.inkhabar.com/politics/mp-news-hearing-will-be-held-in-supreme-court-today-regarding-paid-news-against-home-minister-narottam-mishra/</link><pubDate>April 19, 2023, 5:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-31-300x169.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>भोपाल। शिवराज सरकार में मौजूदा गृहमंत्री और दतिया से विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अंतिम सुनवाई होगी। बीते बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की जानी थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में दूसरे केसों की बहस लंबी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;भोपाल। &lt;/strong&gt;शिवराज सरकार में मौजूदा गृहमंत्री और दतिया से विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अंतिम सुनवाई होगी। बीते बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की जानी थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में दूसरे केसों की बहस लंबी चलने की वजह से सुनवाई टाल दी गई थी और आज इस मामले में दोपहर भोजन अवकाश के पूर्व ही सुनवाई होने की संभावना है। इससे पहले 2 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को एक्सटेंड कर दिया गया था। इसके बाद अगली तारीख 12 अप्रैल तय हुई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नरोत्तम मिश्रा को तीन साल के लिए किया था अयोग्य घोषित&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने 23 जून 2017 को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10A के तहत 3 साल के लिए नरोत्तम मिश्रा को अयोग्य करार दिया था। इस फैसले को लेकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद शिकायतकर्ता राजेन्द्र भारती ने प्रदेश में राजनीतिक दबाव को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को उठाया था। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने केस को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट में भेज दिया था।&lt;/p&gt;
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