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पुलिस मुख्यालय ने जारी किया नया आदेश, अब सेक्स वर्कर महिला पर नहीं होगा कोई केस दर्ज

भोपाल। मध्यप्रदेश में देह व्यापार से जुड़े मामलों में एक अहम बदलाव किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया है कि होटल और ढाबों में पुलिस रेड के दौरान पाई गई सेक्स वर्कर को आरोपी नहीं माना जाएगा। आदेश में कहा गया कि रेड में पाई गई सेक्स वर्कर को आरोपी की श्रेणी […]

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  • April 5, 2025 10:12 am IST, Updated 13 hours ago

भोपाल। मध्यप्रदेश में देह व्यापार से जुड़े मामलों में एक अहम बदलाव किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया है कि होटल और ढाबों में पुलिस रेड के दौरान पाई गई सेक्स वर्कर को आरोपी नहीं माना जाएगा। आदेश में कहा गया कि रेड में पाई गई सेक्स वर्कर को आरोपी की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

स्वैच्छिक लैंगिक कार्य अवैध नहीं

यह आदेश राज्य की विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने जारी किया है। यह आदेश सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और भोपाल की पुलिस कमिश्नरों को भेजा है।
पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की ओर से जारी आदेश में लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय क्रिमिनल अपील संख्या 135/2010 बुद्धदेव कर्मास्कर विरुद्ध पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य में पारित आदेशानुसार वैश्यालयों पर छापेमारी की दशा में स्वैच्छिक लैंगिक कार्य अवैध नहीं है। केवल वैश्यालय चलाना अवैध है।

सेक्स वर्कर को नहीं किया जाएगा परेशान

आदेश में कहा गया है कि यह देखने में आया है कि कुछ जिलों में जब अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई की जाती है, तो देह व्यापार में शामिल महिला को भी आरोपी माना जाता है। आदेश में लिखा है कि सेक्स वर्कर को गिरफ्तार, दंडित या परेशान नहीं करना चाहिए। इन दिशा-निर्देशों का अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के केस में सुदृढ़ता और कड़ाई से पालन करें।

सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा

PHQ के आदेश में यह भी उल्लेख है कि ऐसे मामलों में होटल और ढाबा संचालकों की भूमिका की जांच की जाएगी। अगर वे पैसों के बदले अपने प्रतिष्ठानों को वेश्यालय के रूप में चलाने की अनुमति देते हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस दौरान बरामद की गई महिलाओं के साथ शोषित की तरह व्यवहार नहीं किया जाएगा, न कि उन्हें अपराधी की तरह ट्रीट किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले की भावना के अनुरूप है, जिसमें सेक्स वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा की बात कही गई थी।


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