लखनऊ। आज 2 अप्रैल यानी बुधवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। इस दिन मां कूष्मांडा की विधिपूर्वक आराधना की जाती है। मान्यता है कि इनकी उपासना से सम्मान, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें वे धनुष, कमंडल, […]
लखनऊ। आज 2 अप्रैल यानी बुधवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। इस दिन मां कूष्मांडा की विधिपूर्वक आराधना की जाती है। मान्यता है कि इनकी उपासना से सम्मान, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें वे धनुष, कमंडल, बाण, अमृत कलश, कमल, चक्र, गदा और जप माला धारण किए हुए हैं।
ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसीलिए उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है। इन्हें सृष्टि का रचनाकार भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा से यश, आयु, बल और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। रवि योग सुबह 06 बजकर 10 मिनट से शुरु होगा। जो रात 08 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। इसके साथ ही विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से लगेगा। दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा। इस दौरान आप पूजा-पाठ करना शुभ होता है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। वहां मां कूष्मांडा की प्रतिमा को स्थापित करें। प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाए। देवी को कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं। मां को लाल रंग का वस्त्र के साथ श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। मां को भोग लगाकर मंत्र जाप करें। मां की आरती कर पुष्प अर्पित करें। मां को भोग लगाने के बाद प्रसाद को सभी में वितरित करें।
मां कूष्मांडा के मंत्र
ऊं कूष्माण्डायै नम:
बीज मंत्र: कूष्मांडा: ऐं ह्रीं देव्यै नम:
ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥