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                    <title><![CDATA[निर्जला एकादशी 2025: इन चीजों का करें दान, जानें सही दान विधि और लाभ]]></title>
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                    <description><![CDATA[भोपाल। आज निर्जला एकादशी है। आज पूरा भारत इस दिन को मना रहा है। आज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन व्रत करने से 24 एकादशियों के बराबर फल मिलता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> आज निर्जला एकादशी है। आज पूरा भारत इस दिन को मना रहा है। आज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन व्रत करने से 24 एकादशियों के बराबर फल मिलता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं इस दिन किन चीजों का दान करना चाहिए।
<h2>किन चीजों को करें दान</h2>
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पानी से भरा घड़ा या पानी का बर्तन दान करना लाभकारी होता है। यह दान-पुण्य काम निर्जला एकादशी के दिन करना शुभ होता है। एकादशी और द्वादशी पर पारण करते समय ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। अगर आपकी क्षमता हो तो इस दिन गाय दान करना भी लाभकारी होता है। गाय दान करने से कई गुना फल मिलता है। आज के दिन किसी जरूरतमंद को फल और कपड़े दान करना भी लाभकारी होता है। साथ ही पंखे और मीठी चीजों को भी दान करना शुभ होता है। अब सवाल उठता है कि आखिर दान कैसे करें।
<h3><strong>किस तरह करें दान</strong></h3>
इसलिए आज के दिन घड़ा खरीदकर लाएं। जो घड़ा आप लाए हैं, उसे पहले अच्छे से धोएं। उस पर स्वास्तिक बनाएं। स्वास्तिक बनाने के बाद उस पर कलावा बांधें। इसके अलावा हाथ का पंखा, फल और कपड़े दान करना भी शुभ माना जाता है। इन सभी चीजों को दान करने से पहले भी इन पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। दान करने वाली चीजों पर स्वास्तिक बनाने के बाद इन्हें भगवान विष्णु के आगे रखें। साथ ही हाथ में थोड़ा पानी लेकर संकल्प लें। संकल्प लें कि मैं आज ये चीजें दान कर रहा हूं और हाथ में लिया पानी इन पर छिड़क दें। इसके बाद घड़े के ऊपर लगे ढक्कन पर तुलसी और मिश्री आदि रखें। इसके बाद निर्जला एकादशी के दिन किसी भी जरूरतमंद को इन चीजों को दान कर दें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है रंभा तीज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[भोपाल। हिंदू धर्म में रंभा तीज का खास महत्व होता है। रंभा तीज का यह व्रत रंभा देवी को समर्पित होता है। रंभा तीज के दिन देवी रंभा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। रंभा तीज के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती है। रंभा तीज का व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को रंभा देवी का [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> हिंदू धर्म में रंभा तीज का खास महत्व होता है। रंभा तीज का यह व्रत रंभा देवी को समर्पित होता है। रंभा तीज के दिन देवी रंभा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। रंभा तीज के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती है। रंभा तीज का व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को रंभा देवी का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही दंपति जीवन में स्नेह और प्यार बढ़ता है।
<h2><strong>रंभा तीज का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रंभा तीज मनाई जाती है। इस साल रंभा तीज 29 मई यानी आज मनाई जा रही है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही रंभा देवी की पूजा-पाठ करती हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक सर्वार्थ सिद्धि योग रात 10 बजकर 38 मिनट से शुरू होगा। जो अगले दिन 05 बजकर 24 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। रवि योग रात 10 बजकर 38 मिनट से लेकर अगले दिन 05 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
<h3><strong>रंभा तीज की पूजा विधि</strong></h3>
रंभा तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहन लें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर देवी रंभा की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। रंभा देवी को लाल रंग के फूल, मौसमी फल, श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साथ ही सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें। रंभा तीज के दिन अप्सरा रंभा को पूजा जाता है,जिन्हें सौंदर्य, सौभाग्य और समृद्धि की देवी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में अप्सरा रंभा भी शामिल थी। इस खास अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत करती है। साथ ही सच्चे मन से देवी रंभा को याद करती है। ऐसा कहा जाता है कि रंभा तीज का व्रत करने से रंभा देवी, भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज अक्षय तृतीया के दिन करें ये शुभ काम, जीवन बनेगा खुशहाल]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/do-this-auspicious-work-on-akshaya-tritiya-today-life-will-become-happy/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। आज पूरा देश अक्षय तृतीया मना रहा है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया अक्षय तृतीया होती है। अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन वृंदावन में बांके बिहारी के चरण दर्शन होते हैं। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का खास महत्व होता है। अक्षय का अर्थ होता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> आज पूरा देश अक्षय तृतीया मना रहा है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया अक्षय तृतीया होती है। अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन वृंदावन में बांके बिहारी के चरण दर्शन होते हैं। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का खास महत्व होता है। अक्षय का अर्थ होता है जिसकी क्षति न हो सके। दान-पुण्य के लिए भी ये दिन महत्वपूर्ण होता है। आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किन तरीकों को अपनाने से खुशहाली आती है।
<h2><strong>पीले वस्त्र धारण करें</strong></h2>
अक्षय तृतीया के दिन विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी होता है। साथ ही पीले कपड़े भगवान विष्णु के प्रिय होते हैं, इसलिए आज के दिन पीले रंग के कपड़े पहनें।
<h3><strong>सोना-चांदी खरीदें</strong></h3>
अक्षय तृतीया के दिन सोने और चांदी के अभूषण खरीदना शुभ होता है। आज के दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदने से पूरे साल घर में सुख और समृद्धि आती है। अगर सोना-चांदी खरीदने में असमर्थ हैं तो आप पीतल के बर्तन या पीली सरसों खरीद सकते हैं।
<h3><strong> नए कार्य की शुरुआत</strong></h3>
अक्षय तृतीया के दिन नया व्यापार शुरू करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन व्यापार शुरू करने से काम में तरक्की मिलती है। इस दिन नए घर में प्रवेश या निर्माण कार्य भी शुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन विवाह करने से दंपति जीवन सुखी रहता है।
<h3><strong>पित्तरों का तर्पण करें</strong></h3>
अक्षय तृतीया के दिन तर्पण करना और तीर्थ यात्रा करने से भी कई लाभ मिलते हैं। अगर आप तीर्थ यात्रा करने के बारे में सोच रहे थे तो अक्षय तृतीया का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। पितरों के तर्पण के लिए यह दिन अच्छा है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[क्यों मनाते हैं गुड फ्राइडे, आइए जानते हैं इसका इतिहास]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/why-do-we-celebrate-good-friday-lets-know-its-history/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का पवित्र त्योहार है। यह दिन प्रभु यीशु मसीह को समर्पित होता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग उपवास, मौन और ध्यान का पालन करते हैं। आज के दिन ईसाई धर्म के लोग चर्चों में जाकर खास प्रार्थना करते हैं।आइए आज हम जानते हैं कि दुख के दिन को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का पवित्र त्योहार है। यह दिन प्रभु यीशु मसीह को समर्पित होता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग उपवास, मौन और ध्यान का पालन करते हैं। आज के दिन ईसाई धर्म के लोग चर्चों में जाकर खास प्रार्थना करते हैं।आइए आज हम जानते हैं कि दुख के दिन को क्यों बोलते हैं गुड फ्राइडे।
<h2><strong>गुड फ्राइडे का इतिहास</strong></h2>
प्रभु यीशु मसीह का जन्म बेथलम में हुआ था। उन्होंने धर्म के रास्ते पर चलकर बुराइयों का नाश किया। साथ ही लोगों को मानवता का पाठ पढ़ाया। बुरे लोगों को ईसा मसीह का यह रास्ता पसंद नहीं आया। उन्होंने उनके खिलाफ अफवाह फैला दी, जिसके बाद यहूदी शासकों ने यीशु मसीह को सूली पर चढ़ा दिया। जिस दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया, वह दिन कोई और नहीं बल्कि शुक्रवार का ही दिन था, इसलिए इसे गुड फ्राइडे के नाम से जाना जाता है। दरअसल अंग्रेजी में गुड को होली यानी पवित्र कहते हैं।
<h2><strong>कैसे दी यीशु को सजा</strong></h2>
गुड फ्राइडे को ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है। ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबल में भी यह बताया गया है कि लगभग 6 घंटे तक ईसा मसीह को कीलों से ठोका गया था। इसके बाद उन्हें सूली पर लटकाया गया। इस घटना के 2 दिन बाद यानी रविवार को प्रभु ईसा मसीह फिर से जीवित हुए थे, जिसे ईस्टर के नाम से मनाया जाता है। गुड फ्राइडे ईसाई धर्म मानने वालों के लिए बेहद खास होता है।
<h2><strong>यीशु मसीह का स्मरण</strong></h2>
ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन ही सूली पर चढ़ाया गया था, जिसे आज दुनियाभर में फ्राइडे के रूप में मनाते हैं। आज के दिन ईसाई धर्म के लोग यीशु को याद करते हैं। इस दिन पर यीशु मसीह की पीड़ा और मानव जाति के लिए उनके बलिदान के लिए याद किया जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है चैत्र पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/today-is-chaitra-purnima-know-the-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। आज यानी 12 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जा रही है। यह पूर्णिमा हिंदू नव वर्ष की पहली पूर्णिमा है। इस दिन स्नान और दान करना फलदाई होता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जी की जयंती भी मनाई जाती है। चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी की आराधना और पितरों के लिए तर्पण [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> आज यानी 12 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जा रही है। यह पूर्णिमा हिंदू नव वर्ष की पहली पूर्णिमा है। इस दिन स्नान और दान करना फलदाई होता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जी की जयंती भी मनाई जाती है। चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी की आराधना और पितरों के लिए तर्पण करने का खास महत्व होता है। इस साल चैत्र पूर्णिमा व्रत 12 अप्रैल यानी आज रखा जाएगा।
<h2><strong>चैत्र पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
इस साल की चैत्र पूर्णिमा पर कई तरह के शुभ संयोग बन रहे हैं। चैत्र पूर्णिमा की शुरुआत 12 अप्रैल सुबह 3 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी। ऐसे में 11 तारीख की मध्य रात्रि के बाद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत हो गई। इसी दिन से बैसाख स्नान किया जाएगा। चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त 12 अप्रैल की सुबह 4:29 मिनट से 13 अप्रैल सुबह 5:14 मिनट तक रहेगा।
<h2><strong>चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि</strong></h2>
चैत्र पूर्णिमा पर स्नान और दान करने का महत्व होता है, इसलिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इस दिन सत्य नारायण की आराधना भी की जाती है। परिवार के साथ सत्य नारायण कथा सुनने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, धूप और दीप अर्पित करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु को मीठे में खीर, मिठाई और फल का भोग लगाना चाहिए। पूर्णिमा के दिन विष्णु जी के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
<h2><strong>चैत्र पूर्णिमा के लाभ</strong></h2>
भारतीय संस्कृति में चैत्र पूर्णिमा का काफी महत्व होता है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। 12 अप्रैल को हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा और सत्य नारायण जैसे संयोग बन रहे हैं। इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और हनुमान जी की कृपा मिलती है। पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान पूजा भी लाभदायक होती है। इस दिन दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है चैत्र छठ का तीसरा दिन, जानें संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त और महत्व]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/today-is-the-third-day-of-chaitra-chhath-know-the-auspicious-time-and-importance-of-evening-prayer/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। चैत्र छठ 2025 का आज तीसरा दिन है, जिसे संध्या अर्घ्य का दिन माना जाता है। छठ पर्व के तीसरे दिन का विशेष महत्व है। इसी दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> चैत्र छठ 2025 का आज तीसरा दिन है, जिसे संध्या अर्घ्य का दिन माना जाता है। छठ पर्व के तीसरे दिन का विशेष महत्व है। इसी दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
<h2><strong>चत्र छठ की पूजा विधि</strong></h2>
व्रती पूरे दिन उपवास रखती हैं। शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए तैयार होती है। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घर से निकलती हैं। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जल, दूध और गन्ने के रस का इस्तेमाल किया जाता है। प्रसाद के रूप में चावल के लड्डू, ठेकुआ और फलों का भोग बांटा जाता है। चैत्र छठ का यह दिन व्रतियों के लिए खास आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। अगले दिन सुबह के समय उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने की प्रक्रिया को संध्या अर्घ्य कहा जाता है।
<h2><strong>संध्या अर्घ्य का महत्व</strong></h2>
अर्घ्य अर्पित करने के बाद छठ महापर्व की समाप्ति होती है। आज संध्या अर्घ्य का आयोजन किया जाएगा। 3 अप्रैल यानी आज संध्या अर्घ्य देने का समय शाम 6:40 बजे तक निर्धारित है। आज के दिन सूर्यास्त का यही समय उत्तम है। संध्या अर्घ्य का महत्व हमारी संस्कृति में काफी गहरा है। ऐसी मान्यता है कि सूर्य के अस्त होते समय अर्घ्य अर्पित करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। सूर्य अर्घ्य से सपनों को साकार करने और भाग्य को बढ़ाने का एक मार्ग मिलता है।
<h2><strong>संतान को दीर्घायु की प्राप्ति</strong></h2>
सूर्य देव की कृपा से परिवार में समृद्धि आती है। साथ ही संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है। संध्या अर्घ्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। यह अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की भी शिक्षा प्रदान करता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है नवरात्रि का चौथा दिन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/today-is-the-fourth-day-of-navratri-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। आज 2 अप्रैल यानी बुधवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। इस दिन मां कूष्मांडा की विधिपूर्वक आराधना की जाती है। मान्यता है कि इनकी उपासना से सम्मान, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें वे धनुष, कमंडल, [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>लखनऊ।</strong> आज 2 अप्रैल यानी बुधवार को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। इस दिन मां कूष्मांडा की विधिपूर्वक आराधना की जाती है। मान्यता है कि इनकी उपासना से सम्मान, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें वे धनुष, कमंडल, बाण, अमृत कलश, कमल, चक्र, गदा और जप माला धारण किए हुए हैं।
<h2><strong>पूजा करने का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसीलिए उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है। इन्हें सृष्टि का रचनाकार भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा से यश, आयु, बल और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। रवि योग सुबह 06 बजकर 10 मिनट से शुरु होगा। जो रात 08 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। इसके साथ ही विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से लगेगा। दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा। इस दौरान आप पूजा-पाठ करना शुभ होता है।
<h2><strong>मां कूष्मांडा की पूजा विधि</strong></h2>
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। वहां मां कूष्मांडा की प्रतिमा को स्थापित करें। प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाए। देवी को कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं। मां को लाल रंग का वस्त्र के साथ श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। मां को भोग लगाकर मंत्र जाप करें। मां की आरती कर पुष्प अर्पित करें। मां को भोग लगाने के बाद प्रसाद को सभी में वितरित करें।
<h2><strong>इन मंत्रों का करें जाप</strong></h2>
मां कूष्मांडा के मंत्र

ऊं कूष्माण्डायै नम:

बीज मंत्र: कूष्मांडा: ऐं ह्रीं देव्यै नम:

ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
                    <guid>https://mp.inkhabar.com/religious/today-is-the-fourth-day-of-navratri-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है शनि अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/today-is-shani-amavasya-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इत्यादि से पितरों की नाराजगी दूर होती है। साथ ही पितृ दोष और काल सर्प दोषों से भी मुक्ति मिलती है। इस समय चैत्र का महीना चल रहा है। चैत्र माह की अमावस्या 29 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इत्यादि से पितरों की नाराजगी दूर होती है। साथ ही पितृ दोष और काल सर्प दोषों से भी मुक्ति मिलती है। इस समय चैत्र का महीना चल रहा है। चैत्र माह की अमावस्या 29 मार्च को है।
<h2><strong>शनि अमावस्या का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
इस दिन शनिवार पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाएगा। कहा जाता है कि शनिश्चरी अमावस्या के दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों के साथ शनिदेव की कृपा भी साधक पर बनी रहती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। शनि अमावस्या पर चैत्र कृष्ण अमावस्या की शुरूआत 7 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी। जिसकी समाप्ति 4 बजकर 27 मिनट पर होगी। वहीं स्नान-दान का शुभ मुहूर्त पूरे दिन है।
<h2><strong>शनिश्चरी अमावस्या की पूजा विधि</strong></h2>
शनि अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। अगर किसी नदी या सरोवर में जाकर स्नान करते है तो बहुत अच्छा होगा। स्नान के बाद घर के मंदिर में दीया जलाएं। मंदिर में दीया जलाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। आप चाहे तो इस दिन भी व्रत रख सकते हैं। इस दिन पितर संबंधित कार्य करना चाहिए। इस दिन हो सके तो भगवान का ध्यान करें। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से खास लाभ की प्राप्ति होती है।
<h2><strong>पितरों का श्राद्ध करें</strong></h2>
शनि अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शनि अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही कुंडली में ढैय्या, साढे़साती और शनि की बुरी दृष्टि से छुटकारा मिलता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शनि अमावस्या के दिन करें ये काम, सारे पितृ दोष होंगे माफ]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/do-this-work-on-the-day-of-shani-amavasya-all-the-sins-of-ancestors-will-be-forgiven/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। शनि अमावस्या 29 मार्च, शनिवार को है। इस बार शनि अमावस्या चैत्र माह में पड़ रही है। यह दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन शनि देव से जुड़े उपाय किए जाते हैं, ताकि पितृ दोष से मुक्ति मिल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> शनि अमावस्या 29 मार्च, शनिवार को है। इस बार शनि अमावस्या चैत्र माह में पड़ रही है। यह दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन शनि देव से जुड़े उपाय किए जाते हैं, ताकि पितृ दोष से मुक्ति मिल सके।
<h2><strong>पितृ दोषों से मिलती है मुक्ति</strong></h2>
अगर आपकी कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति, साढ़े साती, ढैय्या आदि चल रही है तो इनसे छुटकारा पाने के लिए कई तरह के टोटके अपनाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनि अमावस्या पर शनि देव की पूजा और शनि मंत्रों का जप करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। अमावस्या पर दीपदान का भी खास महत्व होता है। शनि अमावस्या 29 मार्च को है। इस दिन शनि का गोचर होगा। वह मीन राशि में प्रवेश करेगा। वहीं अमावस्या तिथि पर माना जाता है कि पितृ धरती पर आते हैं। वहीं शनि अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका होता है।
<h2><strong>शनि अमावस्या के दिन तर्पण</strong></h2>
पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दीपदान, तर्पण किया जाता है। शनि अमावस्या पर मंदिर या गरीबों में तिल का दान किया जाता है। इसके अलावा गाय को चारा और पक्षियों को दाना डाला जाता है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष दूर होते हैं। शनि देव को कर्म और न्याय का देवता कहा जाता है। ऐसे में सच्चे मन से शनि अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने और सेवा करने से पितृ दोष शांत होता है। शनि अमावस्या के दिन हनुमान जी की उपासना करना उत्तम माना जाता है।
<h2><strong>छायादान भी कर सकते हैं</strong></h2>
इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और बजरंग बाण कराने से घर में शांति बनी रहती है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और शनि मंत्र का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह शांत होते हैं। शनि देव के मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा छायादान भी कर सकते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[हिंदू पंचांग के पहले महीने चैत्र की शुरूआत, जानें क्यों है यह माह खास]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/the-first-month-of-the-hindu-calendar-chaitra-begins-know-why-this-month-is-special/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। भारतीय पंचांग का पहला महीना चैत्र होता है। चित्रा नक्षत्र से संबंध होने के कारण इसका नाम चैत्र रखा गया है। चैत्र माह से ही वसंत का समाप्ति होती है और ग्रीष्म का आरम्भ होता है। ग्रीष्म के साथ ही शुभता और ऊर्जा की भी शुरूआत होती है। इस महीने से ज्योतिष का बहुत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> भारतीय पंचांग का पहला महीना चैत्र होता है। चित्रा नक्षत्र से संबंध होने के कारण इसका नाम चैत्र रखा गया है। चैत्र माह से ही वसंत का समाप्ति होती है और ग्रीष्म का आरम्भ होता है। ग्रीष्म के साथ ही शुभता और ऊर्जा की भी शुरूआत होती है। इस महीने से ज्योतिष का बहुत गहरा संबंध होता है। इस बार चैत्र का महीना 15 मार्च यानी आज से शुरू हो रहा है। ये 12 अप्रैल तक रहेगा। आइए जानते है चैत्र माह की महिमा के बारे में।
<h2>इस महीने करें सूर्य देव की उपासना</h2>
इस महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। इस माह में सूर्य देव की उपासना से आपको कई तरह के लाभ मिलते है। इस महीने में सफलता और पद प्रतिष्ठा के लिए सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करना उत्तम होता है। शक्ति और ऊर्जा के लिए देवियों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस महीने में लाल फलों का दान करने से आपको फायदा होगा। नियमित रूप में पेड़ पौधों में जल डालें। चैत्र के महीने की शुरूआत से अनाज खाना धीरे-धीरे कम कर देना चाहिए।
<h2><strong>ग्रीष्म की शुरूआत में करें ये काम</strong></h2>
ग्रीष्म के महीने में ज्यादा पानी पिएं। ज्यादा से ज्यादा फलों का सेवन करें। ऐसा करने से आपको स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ की प्राप्ति होगी। इस महीने में गुड़ से परहेज करना चाहिए। बल्कि इस महीने में चना का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। चैत्र में बासी भोजन नहीं खाना चाहिए। चैत्र में कृष्ण पक्ष की पंचमी को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इसी महीने में पापमोचनी एकादशी भी मनाई जाती है। इस महीने होली के बाद से नवसंवत्सर का आरम्भ भी होता है। इसी महीने ही चैत्र नवरात्र की शुरूआत होती है।
<h2><strong>चैत्र माह में पड़ने वाले त्योहार</strong></h2>
इसी माह की नवमी तिथि को श्रीराम जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। इस दिन तमाम धार्मिक कृत्य और दान जैसे कार्यों को करने की परंपरा है। चैत्र माह में17 मार्च 2025 यानी आज के दिन भालचद्र संकष्टी चतुर्थी है। वहीं 19 मार्च 2025 को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। 21 मार्च 2025 को शीतला सप्तमी पड़ेगी। 22 मार्च2025 को शीतला अष्टमी को मनाया जाएगा। 25 मार्च 2025 - पापमोचिनी एकादशी मनाने की परंपरा है। 27 मार्च 2025 - प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि दोनों ही पड़ेंगी। 29 मार्च 2025 - सूर्य ग्रहण, चैत्र अमावस्या पड़ेगा। 30 मार्च 2025 - गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि की पर्व मनाया जाएगा। 31 मार्च 2025 - गणगौर होगा। 06 अप्रैल 2025 – रामनवमी पड़ेगी। वहीं 12 अप्रैल 2025 - चैत्र पूर्णिमा हनुमान जयंती मनाई जाएगी।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[होली के त्योहार में ना हो सेहत पर वार, रंग में भंग डालने के बचने के लिए करें ये उपाय]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/holi-festival-should-not-harm-your-health-follow-these-measures-to-avoid-spoiling-the-colours/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। जिस तरह रंगों के बिना होली नहीं होती, उसी तरह गुजिया की मिठास के बिना त्योहार अधूरा सा लगता है। तभी तो होली आने के कुछ दिन पहले से ही घरों में गुजिया बनाई जाती है, ताकि परिवार के सदस्य इन गुजिया का मजा ले सके। कभी-कभी स्वाद के चक्कर में हम ओवरइटिंग कर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> जिस तरह रंगों के बिना होली नहीं होती, उसी तरह गुजिया की मिठास के बिना त्योहार अधूरा सा लगता है। तभी तो होली आने के कुछ दिन पहले से ही घरों में गुजिया बनाई जाती है, ताकि परिवार के सदस्य इन गुजिया का मजा ले सके। कभी-कभी स्वाद के चक्कर में हम ओवरइटिंग कर लेते हैं। जिससे फूड प्वॉइजनिंग की समस्या हो जाती है।
<h2><strong>सेहत का ध्यान रखें</strong></h2>
जो हमारे त्योहार के मजे का किरकिरा कर देती हैं। त्योहार का मजा लेने के लिए जरूरी है कि हम सेहत का ध्यान रखें। आज हम आपको बताते हैं कि होली के दिन आप कैसे अपना ध्यान रख सकते है।
<h2><strong>ओवरइटिंग से बचें</strong></h2>
त्योहारों के मौके पर ओवरइटिंग से बचना चाहिए। कई बार ज्यादा खाने से लोगों में बदहजमी और ओवरइटिंग हो जाती है। जिससे आपको पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हो जाती है। ना चाहते हुए भी डॉक्टर के पास जाना पड़ता है।
<h2><strong>अनहेल्दी खाने से बचें</strong></h2>
होली पर तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाने से बचना चाहिए। ज्यादा अनहेल्दी खाने से आपको कई समस्या हो सकती है। जिससे आपका मजा किरकिरा हो सकता है। कभी-कभी ज्यादा तबीयत भी खराब हो जाती है।
<h2><strong>ज्यादा  पानी पिएं</strong></h2>
होली के समय लोगों को खाना तो याद रहता है,लेकिन पानी पीना याद नहीं रहता है। त्योहारो के समय हमे ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। हमे दिन में 8 गिलास पानी पीना चाहिए। इससे खाना आसानी से पच जाता है।
<h2><strong>व्यायाम करें</strong></h2>
त्योहारों के मौके पर ज्यादा तला भुना खाने से लोगों में पाचन की समस्या होती है। ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि अगर हम ज्यादा ओवरइटिग करते है तो व्यायाम करना ना भूले। व्यायाम करने से कैलोरी जल्दी बर्न होती है।
<h2><strong>मादक पदार्थों से बचें</strong></h2>
होली के दिन भांग, शराब जैसे मादक पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। मादक पदार्थों आपके शरीर को हानि पहुंचाते है। साथ ही यह आपको बीमार बनाते है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
                    <guid>https://mp.inkhabar.com/religious/holi-festival-should-not-harm-your-health-follow-these-measures-to-avoid-spoiling-the-colours/</guid>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[विदेशों में भी होली का खुमार, इस नामों के साथ खेलते हैं रंग]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/holi-is-celebrated-in-foreign-countries-too-people-play-with-these-colours/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। पूरा देश एक दिन पहले ही होली के रंगो में डूबा हुआ है। हर कोई इस त्योहार में डूबकर जश्न मना रहा है। शहर हो या गांव हर जगह उत्साह का माहौल है। बाजारों में अबीर, गुलाल और रंग बाजार में दिखने लगे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली अपने देश के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> पूरा देश एक दिन पहले ही होली के रंगो में डूबा हुआ है। हर कोई इस त्योहार में डूबकर जश्न मना रहा है। शहर हो या गांव हर जगह उत्साह का माहौल है। बाजारों में अबीर, गुलाल और रंग बाजार में दिखने लगे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली अपने देश के अलावा और किन देशों में खेली जाती है। आइए जानते हैं कि रंगों के त्योहार को और किन नामों से जाना जाता है। साथ ही इस कलर को विदेशों में कैसे खेला जाता है।
<h2><strong>यूरोप में द कलर रन</strong></h2>
यूरोपीय देशों में होली को त्योहार को 'द कलर रन' नाम से जाना जाता है। रंगों की चकाचौंध लंदन में ज्यादा देखने को मिलती है। इस त्योहार में लोग व्हाइट शर्ट पहनकर 5 किलोमीटर तक दौड़ते हुए दिखते है। उन पर रंग छिड़के जाते हैं। हर किलोमीटर पर लोगों को सिर से पैर तक रंग दिया जाता है। लंदन, ग्लासगो, मैनचेस्टर और बर्मिंघम जैसी सिटीज में इस फेस्टिवल की धूम रहती है।
<h2><strong>फ्लोरिडा में लाइफ इन कलर</strong></h2>
फ्लोरिडा के एक कॉलेज में कलर पार्टी मनाई गई। अब फ्लोरिडा के देश में होली को 'लाइफ इन कलर' नाम से मनाया जाता है। यह पार्टी होली से ही इंस्पायर है। इसे खेलने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस फेस्टिवल की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं।
<h2><strong>फेस्टिवल ऑफ कलर</strong></h2>
होली की तरह ही एक त्योहार हिप्पियों के लिए बेहद खास होता है। इसे 'फेस्टिवल ऑफ कलर' नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग खूब नाचते-झूमते और गाते हैं। इसकी मस्ती देखने लायक होती है। इस दिन लोग रंगों के साथ मस्ती करते हैं।
<h2>केपटाउन में होली वन</h2>
केपटाउन में भी होली से प्रेरित एक त्योहार मनाया जाता है, जिसका नाम 'होली वन' है। होली वन त्योहार का वहां के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसे खेलने के लिए दूर-दूर से लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं। होली वन में भी रंगों के साथ मस्ती की जाती है।
<h2><strong>टेक्सर में कलरजाम</strong></h2>
टेक्सर में लोग नाच गाने के साथ-साथ रंगों के साथ होली खेलते हैं। यह त्योहार एकदम होली की तरह ही मनाया जाता है। होली को टेक्सर में कलरजाम कहते है। यह फेस्टिवल दुनियाभर में काफी प्रसिद्ध है। लोग इस त्योहार को काफी खूब एंजॉय करते हैं।
<h2><strong>स्पेन में गार्डेन फेस्टिवल</strong></h2>
स्पेन में भी होली मनाई जाती है। इबिज़ा शहर में होली की तरह ही 'होली गार्डेन फेस्टिवल' सेलिब्रेट किया जाता है। बड़ी संख्या में लोग इसमें हिस्सा लेने के लिए दूर-दूर से आते है। इसे भव्य बनाने के लिए काफी पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
                    <guid>https://mp.inkhabar.com/religious/holi-is-celebrated-in-foreign-countries-too-people-play-with-these-colours/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आमलकी एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, वरना हो जाएगा पाप]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/do-not-do-this-work-even-by-mistake-on-the-day-of-amalaki-ekadashi-otherwise-you-will-commit-a-sin/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। फाल्गुन माह में होली से पहले आमलकी एकादशी मनाई जाती है। हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का बहुत महत्व होता है। ये एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसमें विष्णु जी के अलावा शिव और माता लक्ष्मी की पूजा का जाती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन काशी में गौरी-शंकर के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> फाल्गुन माह में होली से पहले आमलकी एकादशी मनाई जाती है। हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी का बहुत महत्व होता है। ये एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसमें विष्णु जी के अलावा शिव और माता लक्ष्मी की पूजा का जाती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन काशी में गौरी-शंकर के साथ होली खेली जाती है।
<h2><strong>कब है आमलकी एकादशी</strong></h2>
आमलकी एकादशी में विष्णु जी की पूजा में आंवले का खास प्रयोग किया जाता है। आमलकी एकादशी का व्रत समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वावा होता है। साथ ही मोक्ष प्राप्ति के लिए भी आमलकी एकादशी का व्रत किया जाता है। आइए जानते हैं इस साल आमलकी एकादशी 2025 में कब है, इसका शुभ मुहूर्त कौन सा है?
<h3><strong>आमलकी एकादशी का शुभ मुहूर्त</strong></h3>
आमलकी एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आमलकी एकादशी 10 मार्च 2025 को मनाई जाएगी। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 9 मार्च 2025 को सुबह 7.45 पर शुरू होगी। जो अगले दिन 10 मार्च 2025 को सुबह 7.44 मिनट पर खत्म होगी। आमलकी एकादशी पर सुबह 6.36 मिनट से सुबह 8.05 मिनट पर पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है। इसके बाद सुबह 9.34 से सुबह 11.03 मिनट पर शुभ का चौघड़िया है।
<h3><strong>आमलकी एकादशी के दिन ना करें ये काम</strong></h3>
आमलकी एकादशी के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।

इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

आमलकी एकादशी के दिन लहसुन और प्याज से परहेज करना चाहिए।

इस दिन नाखुन और बाल नहीं काटने चाहिए।

एकादशी के दिन क्रोध का त्यागर मधुर बोलना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[होली के मौके पर घर लाएं ये 5 चीजें, घर में कभी नहीं होगी पैसों की कमी]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/bring-these-5-things-home-on-the-occasion-of-holi-there-will-never-be-a-shortage-of-money-in-the-house/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। इस साल होलिका दहन 13 मार्च को है। होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाएगी। होली रंगों का त्योहार है। होली परिवार में सुख और आपसी प्रेम और भाईचारा लेकर आता है। होली पर या होलिक दहन से पहले कई लोग वास्तु उपाय करते है। सकारात्म ऊर्जा का प्रवाह मान्यता है इससे मानसिक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> इस साल होलिका दहन 13 मार्च को है। होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाएगी। होली रंगों का त्योहार है। होली परिवार में सुख और आपसी प्रेम और भाईचारा लेकर आता है। होली पर या होलिक दहन से पहले कई लोग वास्तु उपाय करते है।
<h2><strong>सकारात्म ऊर्जा का प्रवाह</strong></h2>
मान्यता है इससे मानसिक और आर्थिक रोग, दोष और परेशानी से छुटकारा मिलता है। होली से पहले कुछ चीजों को घर लाने से व्यक्ति की किस्मत चमकती है। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। घर में बरकत आती है, साथ ही लक्ष्मी का वास होता है।
<h3><strong>चांदी का सिक्का</strong></h3>
होलिका दहन के दिन फाल्गुन पूर्णिमा होती है। इस दिन घर में चांदी का सिक्का, चांदी का हाथी लाना बहुत शुभ होता है। चांदी का सिक्का घर लाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इस दिन चांदी के सिक्के की पूजा करके इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना चाहिए। मान्यता है इससे घर में बरकत आती है।
<h3><strong>तोरण लगाना</strong></h3>
वास्तुशास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार यानी तोरण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा चली जाती है, इसलिए होली पर्व से पहले अपने घर पर मुख्य द्वार पर तोरण लगाएं। इससे सकारात्मकता ऊर्जा का संचार होता है। तोरण घर की शोभा बढ़ाने का भी काम करता है।
<h3><strong>बांस का पोधा लाना</strong></h3>
वास्तु में बांस का पौधा यानी बैम्बू ट्री को लकी प्लांट कहा जाता है। होली पर आप अपने घर में बैम्बू ट्री लगा सकते हैं। ऐसा करने से घर या ऑफिस में आर्थिक तंगी नहीं होती। बांस का पौधा लगाने से अच्छे भाग्य आरंभ हो जाता है। साथ ही सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
<h3><strong>धातु का कछुआ लाना</strong></h3>
कछुए को भगवत स्वरुप माना जाता है। मान्यता है कि अगर आप होली पर्व पर धातु से बना कछुआ घर में लाते हैं तो इससे मां लक्ष्मी की कृपा घर में बनी रहती है। लेकिन ध्यान रखें कि कछुए की पीठ पर श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र बना होना चाहिए। घर में धातु से बना कछुआ लाने से सुख-शांति भी रहती है।
<h3><strong>होलिका की राख</strong></h3>
होली से पहले होलिका दहन की पूजा होती है। होलिका दहन वाले दिन रात के समय होलिका को जलाया जाता है। अगले दिन होली पर होलिका की राख घर लाकर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखे लेना अच्छा माना जाता है। कहते हैं इससे दरिद्रता दूर होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[महामंदिर में शिव-पार्वती के विवाह की रस्में शुरू, आज होगा हल्दी कार्यक्रम]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/marriage-rituals-of-shiva-parvati-started-in-mahamandir-today-there-will-be-haldi-ceremony/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। महाशिवरात्रि से पहले शाजापुर के सभी शिवालय भक्तिमय माहौल में रंगे हैं। मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को लेकर तैयारी जोरो-शोरों पर हैं। मंदिर के पुजारी कैलाश गिरी गोस्वामी ने बताया कि 26 फरवरी को महाशिवरात्रि है। राजराजेश्वरी माता मंदिर के पीछे स्थित मंगलनाथ महादेव मंदिर में रविवार शाम खास [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> महाशिवरात्रि से पहले शाजापुर के सभी शिवालय भक्तिमय माहौल में रंगे हैं। मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को लेकर तैयारी जोरो-शोरों पर हैं। मंदिर के पुजारी कैलाश गिरी गोस्वामी ने बताया कि 26 फरवरी को महाशिवरात्रि है। राजराजेश्वरी माता मंदिर के पीछे स्थित मंगलनाथ महादेव मंदिर में रविवार शाम खास आयोजन हुआ।
<h2><strong>इन मंदिरों में कार्यक्रम की शुरूआत</strong></h2>
राजेश्वरी मंदिर में भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया गया। उन्हें 56 भोगलगाए गए। गोस्वामी ने बताया कि यह उत्सव 22 फरवरी से शुरू होगा, जो महाशिवरात्रि तक चलेगा। शहर के सभी शिवालयों में आज भगवान का हल्दी कार्यक्रम किया जाएगा। भगवान शिव को हल्दी लगाकर पूजन-अर्चन किया जा रहा है। मंदिर रोशनी से जगमगा उठा हैं। शाजापुर के ओंकारेश्वर, सोमेश्वर, जयेश्वर और नीलकंठेश्वर मंदिरों में भी कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। समीपस्थ ग्राम नैनावद के महाकाल मंदिर और पाण्डूखो में भी महाशिवरात्रि की तैयारियां उत्साह से की जा रही है।
<h3><strong>शादी से पहले की सारी रस्म</strong></h3>
भगवान शिव के भजनों का दौर भी शुरू हो गया है। इस खास दिन को लेकर हर शिव भक्त में एक अलग ही उत्साह है। साथ ही सभी शिव मंदिरों में भी इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसकी तैयारियां भी कई दिन पहले से आरंभ हो जाती हैं। मथुरा के भूतेश्वर महादेव मंदिर में भी शिवरात्रि को लेकर तैयारियां जारी है। शिवरात्रि के अवसर पर शिव- पार्वती का विवाह कराया जाता है। अब भूतेश्वर मंदिर में भगवान शिव की शादी से पहले होने वाली रस्मों को निभाया जा रहा है।
<h3><strong>भगवान शिव के गीत गाए जाते हैं</strong></h3>
मंदिरों में हल्दी की रस्म के दौरान भगवान शिव को सबसे पहले हल्दी और तेल का लेपन लगाया जाता है। भगवान को तिलक किया जाता है। इसके बाद उन्हें स्नान करवाकर कर नये वस्त्र पहनाए जाते हैं। उन्हें पीले फूलों से सजाया जाता है। इसके साथ ही मंदिर में आए भक्तों ने भी भगवान की हल्दी रस्म में शामिल होकर एक दूसरे को भगवान की प्रसाद रूपी हल्दी लगाएंगे। साथ ही हल्दी की रस्म के बाद मंदिर में भगवान शिव के गीत गाए जाते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[शुक्रवार के दिन पूजा करने से होगी पैसों की बरसात, बस करें ये काम]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/worshiping-on-friday-will-bring-rain-of-money-just-do-this-work/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, विशेषकर यदि कोई जातक शुक्रवार के दिन उनकी आराधना करता है. इस दिन माता की पूजा करने का एक अलग महत्व है, जिसे समझना आवश्यक है. मां लक्ष्मी को समृद्धि और धन की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से घर में धन और समृद्धि की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>पटना।</strong> माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, विशेषकर यदि कोई जातक शुक्रवार के दिन उनकी आराधना करता है. इस दिन माता की पूजा करने का एक अलग महत्व है, जिसे समझना आवश्यक है. मां लक्ष्मी को समृद्धि और धन की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से घर में धन और समृद्धि की वृद्धि होती है.
<h2><strong>माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व</strong></h2>
धार्मिक मान्यता के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति शुक्रवार के दिन सच्चे मन से मां लक्ष्मी की पूजा करता है, तो उसकी आर्थिक समस्याएं खत्म हो जाती हैं। मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से आर्थिक तंगी खत्म हो जाती है। इस दिन दुर्गा माता, संतोषी माता, और शुक्र की भी पूजा-अर्चना की जाती है। शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति बनी रहती है। साथ ही समृद्धि में वृद्धि होती है। माता लक्ष्मी की पूजा से मन की शांति बनी रहती है।
<h3><strong>आर्थिक तंगी कम होती है</strong></h3>
ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी जी की पूजा से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बना रहता है। गृह क्लेश में कमी आती है। शुक्रवार के दिन धन में वृद्धि के साथ-साथ बुद्धि की भी बढ़ोत्तरी होती है। यही कारण है कि इस दिन माता लक्ष्मी और माता संतोषी की पूजा की जाती है। इस दिन सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए। शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त देखकर माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
<h3><strong>माता लक्ष्मी की पूजा विधि</strong></h3>
शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। ध्यान रहे कि प्रतिमा की स्थापना उत्तर दिशा में की जाएगी। प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी को फूल, लड्डू, चावल और हल्दी चढ़ानी चाहिए। माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। उनकी आरती उतारनी चाहिए। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज से महाकाल में 10 दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव शरू, त्रयोदशी तक होगा विशेष पूजा-अर्चना]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/top-news/from-today-special-worship-will-be-held-in-mahakal-till-10-day-mahashivratri-festival-till-trayodashi/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल: उज्जैन महाकाल मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी धूमधाम से महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा। आज सोमवार से महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिनों तक चलने वाला महाशिवरात्रि का पर्व का आगाज हो चुका है। हर साल यह उत्सव नौ दिनों तक ही मनाया जाता है, लेकिन इस बार यह उत्सव पूरे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल:</strong> उज्जैन महाकाल मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी धूमधाम से महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा। आज सोमवार से महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिनों तक चलने वाला महाशिवरात्रि का पर्व का आगाज हो चुका है। हर साल यह उत्सव नौ दिनों तक ही मनाया जाता है, लेकिन इस बार यह उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलने वाला है। मंदिर पुजारी का कहना है कि इस साल फाल्गुन कृष्ण सप्तमी दो दिन को पड़ रही है, इसलिए शिव रात्रि उत्सव दस दिनों तक मनाया जायेगा। इस पर्व का समापन 26 फरवरी महाशिवरात्रि पर होगा।
<h2>
<strong>इस तरह रहेगा पूरा कार्यक्रम</strong></h2>
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान बाबा महाकाल के अलग-अलग रूपों के दर्शन होंगे। पंचमी से त्रयोदशी तिथि तक बाबा का विशेष पूजा किया जाएगा। हर्ब दिन सुबह आठ बजे से विशेष पूजा शुरू हो जायेगा। इस दौरान महाकाल के गर्भगृह में उनका पूजन किया जाएगा। इस कड़ी में उनके शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक होगा और 11 पंडितों द्वारा रुद्रपाठ पढ़ा जाएगा। दोपहर 1 बजे भोग आरती की जाएगी, इसके बाद 3 बजे संध्या पूजा के बाद भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार होगा।
<h2>
<strong>अलग- अलग रूप में देंगे दर्शन</strong></h2>
बता दें कि शिव नवरात्रि के दौरान अभिषेक-पूजा के विशेष क्रम के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर में भोग आरती और शाम की पूजा का समय बदल जाएगा। फिलहाल, महाकाल मंदिर में सुबह 10 बजे भोग आरती और शाम 5 बजे शाम की पूजा की जाती है, लेकिन शिव नवरात्रि के नौवें दिन दोपहर 1 बजे भोग आरती और 3 बजे शाम की पूजा की जाएगी। वहीं दस दिनों तक महाकाल को चंदन, शेषनाग, घटाटोप, छबीना , होल्कर , मनमहेश , उमा महेश, शिवतांडव , सप्तधान शृंगार रूप में पूजा किया जाएगा। 27 फरवरी की सुबह भगवान सप्तधान्य शृंगार एवं सेहरा के दर्शन होंगे। दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी. इस दौरान मंदिर के कपाट 44 घंटे खुले रहेंगे.

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&nbsp;]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[महाशिवरात्रि के दिन इन चीजों को अर्पित करने से मिलता है भगवान शिव का आशीर्वाद]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/offering-these-things-on-mahashivratri-brings-blessings-of-lord-shiva/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। सनातन धर्म में महाशिवरात्रि पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पड़ती है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी 2025 को हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> सनातन धर्म में महाशिवरात्रि पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पड़ती है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी 2025 को हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का प्रेम विवाह हुआ था।
<h2><strong>भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा</strong></h2>
सनातन धर्म के मुताबिक महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इतना ही नहीं इस दिन शिवलिंग पर कुछ चीजों को अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
<h3><strong>शिवलिंग पर चढ़ाई जाती है ये चीजें</strong></h3>
<strong>काला तिल</strong>- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से व्यक्ति की हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है। शिवलिंग पर काला तिल चढ़ाने से भगवान शंकर प्रसन्न होते है। इसके साथ काला तिल अर्पित करने से शनिदोष और शनि की साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव कम होता है।

<strong>बेलपत्र</strong>- ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव पर बेलपत्र चढ़ाने से घर में बरकत होती है। बेलपत्र अर्पित करने से दरिद्रता मिट जाती है। इसके साथ ही शिव जी पर बेलपत्र अर्पित करने से आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म के मुताबिक बेलपत्र भगवान शंकर को बहुत प्रिय है।

<strong>भांग धतूरा</strong>- शिव पुराण के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान जब विष का प्याला निकला था, जिसे कोई नहीं लेना चाहता था तो देवी-देवता और दानव कुल शिव के पास विष का प्याला लेकर पहुंचे थे। जिसे भगवान शंकर ने सृष्टि की रक्षा के लिए उसे अपने गले में उतार लिया था। जिसके बाद विष के प्रभाव को कम करने के लिए सिर पर भांग-धतूरा रखा गया था। तभी से भगवान शिव को भांग-धतूरा अर्पित किया जाता है।

<strong>चंदन</strong>- महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर को चंदन अर्पित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शंकर को चंदन अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं। साथ ही उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भगवान शिव उन्हें सदैव खुश होने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[मंगलवार के दिन जरूर करें ये उपाय, धन से भर जाएगी झोली]]></title>
                    <link>https://mp.inkhabar.com/religious/%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%af/</link>
                    <description><![CDATA[भोपाल। मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में हनुमान जी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। यह दिन मंगल ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे साहस, पराक्रम और धन-समृद्धि का कारक माना जाता है। अगर आप आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं या किसी मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://mp.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-38.jpg"/><strong>भोपाल।</strong> मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में हनुमान जी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। यह दिन मंगल ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे साहस, पराक्रम और धन-समृद्धि का कारक माना जाता है। अगर आप आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं या किसी मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर जीवन में सुख-समृद्धि पा सकते हैं।
<h2><strong>मंगलवार के शुभ उपाय, जो दूर करेंगे धन की कमी</strong></h2>
<strong>1. हनुमान चालीसा का पाठ करें:</strong> मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं। ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और धन संबंधी समस्याएं भी कम होती हैं।

<strong>2. हनुमान जी को चोला चढ़ाएं:</strong> अगर आप पैसों की कमी से परेशान हैं, तो इस दिन हनुमान जी को चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे जीवन में आर्थिक प्रगति होती है और रुके हुए कार्य बनने लगते हैं।

<strong>3. गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं:</strong> मंगलवार को गरीबों को भोजन कराना और विशेष रूप से मसूर की दाल, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह उपाय धन, वैभव और सुख-समृद्धि को आकर्षित करता है।

<strong>4. मंगल ग्रह की शांति के लिए उपाय:</strong> मंगलवार के दिन लाल रंग के कपड़े पहनना, लाल चंदन का तिलक लगाना और गुड़-चना का भोग लगाना मंगल ग्रह की शांति के लिए लाभकारी होता है। इससे जीवन में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं और पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

5<strong>. मंदिर में नारियल अर्पित करें:</strong> अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना है, तो मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ाकर प्रार्थना करें। इससे आपकी झोली खुशियों और धन से भर सकती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 8:13 am</pubDate>
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