भोपाल। देश की संसद में वक्फ विधेयक मंजूरी मिल गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सियासत गरमा गई है। वहीं आम नागरिकों में यह गहन चर्चा का विषय बन गई है। वक्फ संशोधन बिल 2025, जो लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी बहुमत मिल गया है। बिल पर चली 13 घंटे से ज्यादा बहस […]
भोपाल। देश की संसद में वक्फ विधेयक मंजूरी मिल गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सियासत गरमा गई है। वहीं आम नागरिकों में यह गहन चर्चा का विषय बन गई है। वक्फ संशोधन बिल 2025, जो लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी बहुमत मिल गया है।
सत्ता पक्ष जहां ने विधेयक को वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन का तरीका बताया है। साथ ही मुस्लिम समुदाय के गरीब तबके को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। विपक्ष की बात करें तो विपक्ष इस विधेयक को संविधान विरोधी बता रहा है। राज्यसभा में इस बिल पर 12 घंटे से भी ज्यादा समय तक बहस चली। देर रात 2:32 बजे विधेयक को बहुमत मिला, जिसमें 128 मत बिल के पक्ष में और 95 मत बिल के विपक्ष में डाले गए। इस तरह बहुमत के साथ वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया।
सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे राष्ट्रहित में लिया गया निर्णय बताया। राज्यसभा में बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यह संशोधन वक्फ बोर्ड की लाखों संपत्तियों के समुचित प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उनका कहना है कि इन संपत्तियों का सही इस्तेमाल कर गरीब मुस्लिम समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने यह बिल राज्यसभा में पेश करते हुए बताया कि साल 2006 में सच्चर समिति ने 4.9 लाख वक्फ संपत्तियों का जिक्र किया था, जिससे आय मात्र 163 करोड़ रुपये थी।
वर्तमान में यह संख्या 8.72 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि इन संपत्तियों का सही प्रबंधन हजारों करोड़ रुपये की आय सुनिश्चित किया जा सकता है, जिससे गरीब मुसलमानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बिल से एक भी मुसलमान को किसी तरह की हानि नहीं होगी, लेकिन करोड़ों को फायदा जरूर होगा। बिल को लेकर विपक्ष ने इसका पुरजोर विरोध किया। डीएमके सांसद तिरूचि शिवा ने इसे एक खास समुदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप बताया, तो वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे सीधा-सीधा संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया।