भोपाल। शनि अमावस्या 29 मार्च, शनिवार को है। इस बार शनि अमावस्या चैत्र माह में पड़ रही है। यह दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन शनि देव से जुड़े उपाय किए जाते हैं, ताकि पितृ दोष से मुक्ति मिल […]
भोपाल। शनि अमावस्या 29 मार्च, शनिवार को है। इस बार शनि अमावस्या चैत्र माह में पड़ रही है। यह दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन शनि देव से जुड़े उपाय किए जाते हैं, ताकि पितृ दोष से मुक्ति मिल सके।
अगर आपकी कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति, साढ़े साती, ढैय्या आदि चल रही है तो इनसे छुटकारा पाने के लिए कई तरह के टोटके अपनाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनि अमावस्या पर शनि देव की पूजा और शनि मंत्रों का जप करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। अमावस्या पर दीपदान का भी खास महत्व होता है। शनि अमावस्या 29 मार्च को है। इस दिन शनि का गोचर होगा। वह मीन राशि में प्रवेश करेगा। वहीं अमावस्या तिथि पर माना जाता है कि पितृ धरती पर आते हैं। वहीं शनि अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका होता है।
पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दीपदान, तर्पण किया जाता है। शनि अमावस्या पर मंदिर या गरीबों में तिल का दान किया जाता है। इसके अलावा गाय को चारा और पक्षियों को दाना डाला जाता है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष दूर होते हैं। शनि देव को कर्म और न्याय का देवता कहा जाता है। ऐसे में सच्चे मन से शनि अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने और सेवा करने से पितृ दोष शांत होता है। शनि अमावस्या के दिन हनुमान जी की उपासना करना उत्तम माना जाता है।
इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और बजरंग बाण कराने से घर में शांति बनी रहती है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और शनि मंत्र का जाप करने से कुंडली में शनि ग्रह शांत होते हैं। शनि देव के मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा छायादान भी कर सकते हैं।